कुंभकर्ण की वो 'एक गलती' जिसने बदल दी रामायण की तस्वीर, जानें क्यों 6 महीने सोता था रावण का बलशाली भाई?
रामायण का एक ऐसा पात्र जो अपनी शक्ति के लिए जितना प्रसिद्ध था, अपनी नींद के लिए भी उतना ही चर्चित था- कुंभकर्ण। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि उसका 6 मही ...और पढ़ें

कुंभकर्ण को क्यों आती थी इतनी नींद? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण में रावण के पराक्रम की चर्चा तो हर कोई करता है, लेकिन उसके भाई कुंभकर्ण की शक्ति का कोई सानी नहीं था। कुंभकर्ण केवल शरीर से ही विशाल नहीं था, बल्कि वह एक उच्च कोटि का विद्वान और निष्ठावान योद्धा भी था।
कठोर तपस्या और देवताओं का डर
पौराणिक कथाओं और धर्म ग्रंथों के अनुसार, कुंभकर्ण ने अपने भाइयों रावण (Ravana) और विभीषण के साथ मिलकर ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की थी। उसकी तपस्या इतनी शक्तिशाली थी कि स्वर्ग के राजा इंद्र घबरा गए। इंद्र को डर था कि अगर कुंभकर्ण ने वरदान में उनका 'इंद्रासन' मांग लिया, तो देवताओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
देवी सरस्वती की चाल और जुबान का फिसलना
शास्त्रों और प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक, जब ब्रह्मा जी कुंभकर्ण को वरदान देने के लिए प्रकट हुए, तब इंद्र ने देवी सरस्वती से प्रार्थना की कि वे कुंभकर्ण की मति भ्रमित कर दें। धर्म शास्त्र के अनुसार, जैसे ही कुंभकर्ण ने 'इंद्रासन' (इंद्र का सिंहासन) मांगने के लिए अपना मुंह खोला, उसकी जीभ पर विराजमान मां सरस्वती ने उसे बदलकर 'निद्रासन' (सोने की जगह) कर दिया। ब्रह्मा जी ने 'तथास्तु' कह दिया और इस तरह कुंभकर्ण को 6 महीने तक सोने का श्राप मिल गया।
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(Image Source: AI-Generated)
रामायण के युद्ध में कुंभकर्ण की भूमिका
रामायण के मुताबिक, कुंभकर्ण जानता था कि उसका भाई रावण अधर्म के रास्ते पर है, लेकिन अपनी निष्ठा और भाई के प्रति प्रेम के कारण उसने युद्ध में रावण का साथ दिया। अगर कुंभकर्ण को नींद का यह वरदान न मिला होता और वह पूरी शक्ति के साथ युद्ध में उतरता, तो वानर सेना के लिए उसे हराना लगभग असंभव होता। अंतत: भगवान राम के हाथों उसे मोक्ष प्राप्त हुआ। उस पौराणिक घटना ने रावण के भाई की किस्मत बदल दी।
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जब रावण ने भाई के लिए की प्रार्थना
बाद में कुंभकरण अपनी गलती के लिए बहुत दुखी हुआ। लेकिन, तथास्तु कहने के बाद वरदान को वापस लिया जाना नामुमकिन था। फिर, रावण ने भाई के लिए ब्रह्मा जी से इस कठोर वरदान को कम करने की प्रार्थना की। जिसके बाद ब्रह्मा जी ने इसमें संशोधन करते हुए उसे 6 महीने तक लगातार सोने का वरदान दिया। और, कहा कि ये 6 महीने तक सोएगा और फिर एक दिन के लिए जागेगा।
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