ब्रह्मा जी की उत्पत्ति: जानिए भगवान विष्णु की नाभि से ही क्यों प्रकट हुए सृष्टि के रचयिता?
हिंदू धर्म में ब्रह्मा जी को ब्रह्मांड का रचयिता माना जाता है, जिनकी उत्पत्ति भगवान विष्णु की नाभि से हुई थी। पौराणिक कथा के अनुसार, विष्णु की योगनिद् ...और पढ़ें

कैसे हुई ब्रह्मा जी की उत्पत्ति? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
ब्रह्मा जी को ब्रह्मांड का रचनाकार माना जाता है
भगवान विष्णु की नाभि से कमल पर हुए प्रकट
तपस्या के बाद विष्णु ने दिया सृष्टि का ज्ञान
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में त्रिदेवों में से ब्रह्मा जी एक प्रमुख देवता हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा जी को ब्रह्मांड का रचनाकार माना गया है। उनके मुख से चार महान वेदों की उत्पत्ति हुई है। उन्होंने ही ऋषियों और देवताओं को वेदों का ज्ञान दिया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मा जी भगवान विष्णु की नाभि से ही क्यों निकले। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस लेख में आपको बताते हैं ब्रह्मा जी की उत्पत्ति से जुड़ी कथा के बारे में।
कैसे हुई ब्रह्मा जी उत्पत्ति?
पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि के आरंभ से पहले जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे, तो उस समय सृष्टि में सिर्फ अंधकार था। इसके बाद जब सृष्टि की रचना का समय नजदीक आया, तो भगवान विष्णु की नाभि से एक कमल का फूल प्रकट हुआ। यह कमल अधिक तेजवान था। इसी कमल ने ब्रह्मांड का आधार तय किया। विष्णु जी की नाभि से निकले कमल के मध्य में भगवान ब्रह्मा जी स्वयं अवतरित हुए। नाभि के कमल से उत्पन्न होने की वजह से ब्रह्मा जी पद्मजा के नाम से जाना जाता है।
इसके बाद जब ब्रह्मा जी ने अपनी आंखों को खोला, तो उनको चारों तरफ जल ही दिखाई दिया। ब्रह्मा जी को यह बात पता नहीं थी वे कहां से आएं हैं और उनके अवतरित होने का प्रमुख उद्देश्य क्या है। इसके बाद वे जन्म के स्रोत का पता लगाने के लिए कमल के डंठल के रास्ते नीचे गए। ब्रह्मा जी लंबे समय तक नाल के भीतर यात्रा करते रहे, लेकिन उन्हें उसका कोई अपना जन्मदाता नहीं मिला।
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ब्रह्मा जी ने की कई वर्षों तक तपस्या
इसके बाद ब्रह्मा जी वापस आए और कमल के फूल पर बैठ गए। इस दौरान उनको जल के भीतर से तप शब्द सुनाई दिया। इसके बाद उन्होंने कमल पर बैठकर कई वर्षों तक घोर तपस्या की।
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ब्रह्मा जी की इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वैकुंठ धाम के दर्शन दिए। विष्णु जी ने ब्रह्मा जी को उनके अवतरित की वजह बताई। उनको वेदों का दिव्य ज्ञान प्रदान किया। इसके बाद ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की शुरुआत। भगवान विष्णु की नाभि से उत्पत्ति का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के अध्याय 8 में मिलते है।
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