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    क्यों माघ महीने के नाम से ही कांपती हैं बुरी शक्तियां? क्या कहता है शास्त्र

    Updated: Tue, 06 Jan 2026 07:02 PM (IST)

    शास्त्रों के अनुसार माघ का महीना देवताओं का महीना होता है। जानिए क्यों इस महीने में बुरी शक्तियां कमजोर पड़ जाती हैं। साथ ही, माघ स्नान का धार्मिक महत् ...और पढ़ें

    माघ महीना 2026 (Image Source: AI-Generated)

    माघ महीना 2026 (Image Source: AI-Generated)

    HighLights

    1. माघ स्नान करने वाले व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं

    2. माना जाता है माघ मास में नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है

    3. इस महीने में तिल का दान और हवन करना अच्छा माना जाता है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्मशास्त्रों में माघ का महीना अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। माघ के महीने का महत्व इतना ज्यादा है कि इसे "पुण्य मास" कहा जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों इस महीने के नाम से ही बुरी शक्तियां और नकारात्मक ऊर्जाएं कांपने लगती हैं? शायद आपको नहीं पता होगा। तो आइए जानते हैं इसके पीछे का असली कारण।

    बुरी शक्तियों के भयभीत होने का कारण

    शास्त्रों के अनुसार, माघ मास में सूर्य देव की किरणों में विशेष तेज होता है और वातावरण में सात्विक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। इस महीने में किए गए स्नान, दान और जप का फल अनंत गुना होता है।

    देवताओं का वास: माना जाता है कि माघ के महीने में सभी देवी-देवता स्वर्ग से उतरकर प्रयागराज (संगम) और अन्य पवित्र नदियों में निवास करते हैं। जहां देवताओं का वास होता है,वहां आसुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव स्वत: ही नष्ट होने लगता है।

    अंधकार पर प्रकाश की विजय: माघ का महीना कड़ाके की ठंड और अंधकार के बाद सूर्य के उत्तरायण होने की मजबूती का समय होता है। आध्यात्मिक रूप से यह अज्ञानता के अंधेरे को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

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    शास्त्रों की दृष्टि में माघ का महत्व

    'मत्स्य पुराण' और 'पद्म पुराण' के अनुसार, माघ स्नान करने वाले व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं। जब व्यक्ति के भीतर की नकारात्मकता और पाप खत्म होने लगते हैं, तो बुरी शक्तियां उस पर अपना प्रभाव नहीं डाल पातीं।

    अमृत की बूंदें: कहा जाता है कि माघ मास में नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है। इस 'अमृत जल' के स्पर्श से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है।

    तिल और दान का महत्व: इस महीने में तिल का दान और हवन किया जाता है। तिल को नकारात्मकता सोखने वाला माना गया है, इसलिए इसका उपयोग बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए ढाल का काम करता है।

    साधकों के लिए विशेष समय

    तांत्रिक और आध्यात्मिक साधक इस महीने में विशेष साधना करते हैं। इस दौरान की गई 'कल्पवास' और मंत्र साधना से व्यक्ति का ओरा (Aura) इतना शक्तिशाली हो जाता है कि कोई भी बुरी शक्ति उसके पास फटकने की हिम्मत नहीं करती

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।