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    भीष्म पितामह की मृत्यु का कारण बनी थी यह राजकुमारी, प्रतिशोध की आग ने बदल दिया था युद्ध का इतिहास

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 11:07 AM (IST)

    महाभारत में भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था, लेकिन राजकुमारी अम्बा का प्रतिशोध व अपमान उनकी मृत्यु का कारण बना। ...और पढ़ें

    Mahabharat Katha: एक राजकुमारी का संकल्प और इच्छा मृत्यु का अंत। (Ai Generated Image)

    Mahabharat Katha: एक राजकुमारी का संकल्प और इच्छा मृत्यु का अंत। (Ai Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत के युद्ध में इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त गंगापुत्र भीष्म को हराना देवताओं के लिए भी असंभव था। लेकिन नियति ने उनके अंत की कथा पहले ही लिख दी थी। यह कहानी एक ऐसी राजकुमारी की है, जिसके अपमान और प्रतिशोध ने कुरुक्षेत्र के सबसे शक्तिशाली योद्धा को तीरों की शय्या पर लेटा दिया था। आइए इस आर्टिकल में भीष्म पितामह की मृत्यु की वजह विस्तार से जानते हैं।

    Mahabharat katha

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    प्रतिशोध का जन्म

    महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत के भीष्म पर्व के अनुसार, काशीराज की तीन पुत्रियों अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका का भीष्म ने अपने सौतेले भाई हस्तिनापुर के राजा विचित्रवीर्य से विवाह करवाने के लिए बलपूर्वक अपहरण कर लिया था। बड़ी राजकुमारी अम्बा राजा शाल्व से प्रेम करती थी। जब भीष्म को यह पता चला कि, उन्होंने अम्बा को ससम्मान शाल्व के पास भेज दिया। लेकिन शाल्व ने उसे दूसरे पुरुष द्वारा जीती हुई कहकर उनसे विवाह के लिए से मना कर दिया।

    अपमानित अम्बा वापस भीष्म के पास आई और उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन अपनी भीष्म प्रतिज्ञा की वजह से उन्होंने भी इनकार कर दिया। इस दोहरे अपमान ने अम्बा के अंदर प्रतिशोध की ज्वाला जला दी।

    शिखंडी का अवतार

    अम्बा ने भीष्म के गुरु परशुराम से सहायता मांगी, लेकिन वे भी भीष्म को युद्ध में परास्त न कर सके। अंत में अम्बा ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। महादेव ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि वह अगले जन्म में भीष्म की मृत्यु का कारण बनेगी। अगले जन्म में अम्बा का जन्म राजा द्रुपद के यहां शिखंडी के रूप में हुआ। शिखंडी न पूरी तरह पुरुष था, न पूरी तरह स्त्री। भीष्म अपनी मर्यादा और सिद्धांतों के कारण जानते थे कि शिखंडी पूर्व जन्म की अम्बा थी, और वे किसी स्त्री पर शस्त्र नहीं उठाते थे।

    राजकुमारी का संकल्प भीष्म के वरदान से बड़ा

    युद्ध के 10वें दिन, जब भीष्म पांडव सेना का संहार कर रहे थे, तब अर्जुन ने शिखंडी को अपने रथ के आगे खड़ा किया। जैसे ही भीष्म की दृष्टि शिखंडी पर पड़ी, उन्होंने अपने धनुष-बाण त्याग दिए। इसी का लाभ उठाकर अर्जुन ने भीष्म को बाणों से बेध दिया। इस तरह एक राजकुमारी का संकल्प भीष्म के वरदान से बड़ा साबित हुआ।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया
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