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राजा पांडु की मृत्यु का कारण बना था एक 'श्राप', जानिए क्यों अपनी ही पत्नी को छूना पड़ा उन्हें भारी

Published: Sat, 04 Apr 2026 10:58 AM (IST)

अत्यंत पराक्रमी होने के बावजूद, राजा पांडु को बहुत ही कम उम्र में अकाल मृत्यु का सामना करना पड़ा, जिससे जुड़ी कथा आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

ये श्राप बना राजा पांडु की मृत्यु का कारण (Picture Credit- AI Generated)

ये श्राप बना राजा पांडु की मृत्यु का कारण (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. राजा पांडु को ऋषि के श्राप से अकाल मृत्यु मिली

  2. श्राप के कारण पांडु अपनी पत्नी से संबंध नहीं बना सकते थे

  3. पांडवों का जन्म कुंती और माद्री के दिव्य आह्वान से हुआ

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। राजा पांडु महाभारत के एक प्रमुख पात्रों में से एक रहे हैं, जो हस्तिनापुर के राजा भी थे। कुंती व माद्री उनकी पत्नियां थी। राजा पांडु के पुत्र होने के कारण युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव पांडव कहलाए। धृतराष्ट्र, पांडु के बड़े भाई थे, लेकिन उनके नेत्रहीन होने के कारण पांडु को हस्तिनापुर का राजा बना दिया गया था।

क्यों दिया ऋषि ने श्राप

महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार राजा पांडु शिकार खेलने गए थे। इस दौरान उन्होंने गलती से किंदम ऋषि को हिरण समझकर तीर मार दिया। जिस समय राजा ने तीर चलाया, उस समय ऋषि अपनी पत्नी के साथ प्रणय संंबंध (शारीरिक संबंध) बना रहे थे।

ऐसे में क्रोध में आकर ऋषि ने उन्हें यह श्राप दिया कि तुम्हारी मृत्यु भी इसी अवस्था में होगी, जिस अवस्था में मेरी हो रही है। जब तुम अपनी पत्नी से प्रेम संबंध बनाने की कोशिश करोगे, तो तुम्हें मृत्यु का सामना करना पड़ेगा।

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(Picture Credit- AI Generated)

फिर कैसे हुआ पांडवों का जन्म

ऋषि के श्राप के कारण राजा पांडु संतान उत्पन्न नहीं कर सकते थे। तब कुंती ने पांडु को बताया कि दुर्वासा ऋषि ने उन्हें एक मंत्र दिया है, जिसका उपयोग करके वह किसी भी देवता का आह्वान कर सकती हैं और पुत्र का आशीर्वाद मांग सकती हैं। कुंती ने यह मंत्र माद्री को भी दिया, जिससे दोनों ने अलग-अलग देवताओं का आह्वान कर पुत्र का आशीर्वाद मांगा, जो इस प्रकार है -

  • युधिष्ठिर - कुंती और धर्मराज (यम) के पुत्र।
  • भीम: कुंती और वायुदेव के पुत्र।
  • अर्जुन: कुंती और इंद्रदेव के पुत्र।
  • नकुल और सहदेव: माद्री और अश्विनीकुमार (जुड़वां देवताओं) के पुत्र।

इसलिए हुई राजा की मृत्यु

एक बार राजा पांडु माद्री के प्रति काम-वासना से भर गए और ऋषि किंदम के दिए हुआ श्राप को भूल गए। जब उन्होंने माद्री के साथ प्रेम संबंध बनाने की कोशिश की, तो श्राप के प्रभाव से उनकी तत्काल मृत्यु हो गई। माद्री ने खुद को राजा पांडु की मृत्यु का कारण मानते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। इसके बाद कुंती पांचों पांडवों को लेकर हस्तिनापुर लौट आई।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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