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    Mahabharat: अर्जुन के लिए कैसे वरदान बना एक अप्सरा का श्राप, अज्ञातवास में इस तरह आया काम

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Sun, 08 Mar 2026 01:36 PM (IST)

    महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत संस्कृत वाङ्मय का सबसे बड़ा ग्रंथ है, जिसमें मुख्य रूप से कौरवों और पांडवों के बीच के संघर्ष का वर्णन मिलता है। मह ...और पढ़ें

    उर्वशी के श्राप ने अर्जुन की कैसे की मदद (AI Generated Image)

    उर्वशी के श्राप ने अर्जुन की कैसे की मदद (AI Generated Image)

    HighLights

    1. उर्वशी ने अर्जुन को नपुंसक होने का दिया था श्राप

    2. अर्जुन ने ठुकराया था उर्वशी का प्रेम प्रस्ताव

    3. यह श्राप अज्ञातवास में अर्जुन के लिए बना वरदान

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब पांडवों को चौसर में हारने के बाद वनवास मिला, तो उसमें उन्हें 12 साल के वनवास और एक साल अज्ञातवास मिला था। अपना 12 साल का वनवास समाप्त करने के बाद पांडव विराट नगरी में चले गए। राजा विराट के महल में दौपदी समेत सभी पांडवों ने अलग-अलग जिम्मेदारी निभाई। अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने एक किन्नर का वेश धारण किया, जो उन्हें एक श्राप के रूप में मिला था। चलिए जानते हैं यह कथा।

    इसलिए मिला श्राप

    1 वर्ष के अज्ञातवास के दौरान अर्जुन बृहन्नला के रूप में नृत्य शिक्षक बन गए और राजकुमारी उत्तरा को नृत्य सीखाने लगे। अर्जुन को किन्नर बनने का श्राप अप्सरा उर्वशी से मिला था। कथा के अनुसार, एक बार अर्जुन अपने पिता देवराज इंद्र से मिलने इन्द्रलोक गए थे। अर्जुन का तेज और शौर्य देखकर उर्वशी उन पर मोहित हो गई।

    उन्होंने अर्जुन के सामने प्रेम का प्रस्ताव रखा, लेकिन अर्जुन ने यह कहते हुए इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि वह उर्वशी को माता के समान मानते हैं। क्योंकि उर्वशी पांडवों के वंशज पुरुरवा की पत्नी रह चुकी थीं। इसे अप्सरा उर्वशी ने अपना अपमान समझा और अर्जुन को श्राप दिया कि वह वे नपुंसक यानी किन्नर बन जाएंगे।

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    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    इस तरह श्राप बना वरदान

    जब अर्जुन ने सारी व्यथा देवराज इंद्र को बताई, तो इंद्र ने श्राप की अवधि को एक वर्ष तक सीमित कर दिया और कहा कि वह जब चाहें, अपनी पूर्व अवस्था में लौट सकते हैं। साथ ही इंद्रदेव ने अर्जुक को बताया कि भविष्य में यह श्राप उनके बहुत काम आने वाला है। यह श्राप, वरदान इस तरह साबित हुआ क्योंकि 13वें वर्ष के अज्ञातवास में इस श्राप के जरिए उन्हें रूप बदलकर छिपाने में मदद मिली और उन्होंने सफलतापूर्वक अपना अज्ञातवास पूरा कर लिया।

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    (AI Generated Image)

    अन्य लोगों ने निभाई ये भूमिकाएं

    अज्ञातवास के दौरान युधिष्ठिर कनक नाम के एक ब्राह्मण बन गए और सभापति के तौर पर काम किया। वहीं भीम ने बल्लव नामक रसोइए की भूमिका निभाई। नकुल अज्ञातवास में ग्राथिक नाम धारण किया और मत्स्य राजा के अस्तबल में काम करने लगे।

    वहीं सहदेव अज्ञातवास के दौरान तंतिपाल नाम के गो-सांघिक बन गए और गायों की देखभाल करने लगे। द्रौपदी की बात करें, तो वह सैरंध्री नाम की दासी बन गई, जो राजा विराट की पत्नी सुदेष्णा के केश सवारने का काम करती थी।

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