Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Mahabharata Mystery: युद्ध खत्म होते ही क्यों जलकर राख हो गया अर्जुन का रथ? जानें श्री कृष्ण का गुप्त रहस्य

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 12:00 PM (GMT+05:30)

    Mahabharata Story: क्या आप जानते हैं कि युद्ध खत्म होते ही अर्जुन का दिव्य रथ अचानक राख क्यों हो गया? पढ़ें भगवान श्री कृष्ण का वो गुप्त रहस्य और हनुम ...और पढ़ें

    Mahabharata Story: पढ़ें क्यों जलकर राख हुआ अर्जुन का रथ? (Image Source: Freepik)

    Mahabharata Story: पढ़ें क्यों जलकर राख हुआ अर्जुन का रथ? (Image Source: Freepik)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत का युद्ध केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह रहस्यों और ईश्वरीय लीलाओं से भरा हुआ था। 18 दिनों तक चले इस भीषण संग्राम में कई ऐसी घटनाएं घटीं जो आज भी हमें अचंभित कर देती हैं। ऐसी ही एक सबसे चौंकाने वाली घटना युद्ध के अंतिम दिन घटी, जब अर्जुन का वह दिव्य रथ, जिसने पूरे युद्ध में पांडवों का साथ दिया था, अचानक धू-धू कर जल उठा और राख के ढेर में बदल गया।

    श्री कृष्ण का आदेश

    युद्ध समाप्त हो चुका था। पांडवों की विजय हुई थी। शाम के समय जब अर्जुन और भगवान श्री कृष्ण अपने रथ से वापस लौटे, तो एक अजीब बात हुई। आमतौर पर नियम यह था कि सारथी पहले उतरता है और योद्धा बाद में। लेकिन, उस दिन श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा, "पार्थ! पहले तुम रथ से उतरो।"

    अर्जुन को थोड़ा आश्चर्य हुआ, लेकिन उन्होंने श्री कृष्ण की आज्ञा मानी और रथ से उतर गए। इसके बाद श्री कृष्ण ने रथ के ऊपर ध्वज पर विराजमान हनुमान जी से भी जाने का अनुरोध किया। जैसे ही बजरंगबली वहां से अंतर्ध्यान हुए, श्री कृष्ण भी रथ से उतर गए।

    जब भस्म हुआ रथ

    महाभारत के शांति पर्व और पौराणिक कथाओं में वर्णित प्रसंगों के अनुसार, जैसे ही श्री कृष्ण के पैर जमीन पर पड़े, पूरा रथ भीषण अग्नि की लपटों में घिर गया और देखते ही देखते राख बन गया। यह देखकर अर्जुन सन्न रह गए। उन्होंने हैरानी से पूछा, "हे केशव! यह क्या हुआ? यह दिव्य रथ ऐसे अचानक कैसे जल गया?"

    खबरें और भी

    infographic Mahabharat

    (Image Source: AI-Generated)

    श्री कृष्ण ने खोला 'गुप्त रहस्य'

    अर्जुन के चेहरे पर घबराहट देखकर श्री कृष्ण मुस्कुराए और बोले, "पार्थ! यह रथ तो बहुत पहले ही जल चुका था। भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण के दिव्य अस्त्रों की शक्ति ने इसे काफी समय पहले ही भस्म कर दिया था। लेकिन, चूंकि मैं इस पर बैठा था और हनुमान जी ध्वज पर विराजमान थे, इसलिए यह रथ केवल मेरी संकल्प शक्ति और ईश्वरीय प्रभाव से टिका हुआ था।"

    प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, युद्ध के दौरान कर्ण के 'नागास्त्र' और भीष्म के 'दिव्यास्त्रों' ने रथ की आयु समाप्त कर दी थी। श्री कृष्ण जानते थे कि अगर वे अर्जुन से पहले रथ से उतर जाते, तो अर्जुन रथ के साथ ही जलकर भस्म हो जाते। अपनी प्रतिज्ञा और अर्जुन की रक्षा के लिए कृष्ण ने उस मृत रथ को अंत तक जीवित रखा।

    यह भी पढ़ें- महाभारत युद्ध का वो पल, जब एक महादानी के अंत पर छलके थे माधव के आंसू

    यह भी पढ़ें- कर्ण का नागास्त्र और श्रीकृष्ण का चमत्कार, ऐसे मृत्यु के मुख से वापस आए थे अर्जुन

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।