Mahabharat Katha: किसके श्राप के कारण हुई थी भीम पुत्र घटोत्कच की अकाल मृत्यु?
क्या आप जानते हैं कि घटोत्कच की मृत्यु के पीछे केवल कर्ण नहीं बल्कि द्रौपदी का श्राप भी था? स्कंद पुराण के अनुसार जानें उस घटना के बारे में जिसने घटोत ...और पढ़ें

द्रौपदी ने क्यों दिया था घटोत्कच को श्राप?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत की कथा के अनुसार, जब भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच पहली बार पांडवों के महल में आए, तो उन्होंने अपनी माता के आदेश का पालन करते हुए पिता भीम और अन्य पांडवों को तो प्रणाम किया। लेकिन, द्रौपदी को सम्मान देना भूल गए। घटोत्कच ने द्रौपदी को एक 'साधारण नारी' समझकर उनकी उपेक्षा कर दी। जिसका परिणाम बेहद भयानक रहा।
द्रौपदी का क्रोध और श्राप
स्कंद पुराण के प्रभास खंड के अनुसार, द्रौपदी, जो स्वयं पांचाल नरेश की पुत्री और पांडवों की महारानी थीं, घटोत्कच के इस व्यवहार से अत्यंत अपमानित महसूस करने लगीं। उन्हें लगा कि एक राक्षसी का पुत्र होने के कारण घटोत्कच के भीतर बड़ों और कुल की मर्यादाओं के प्रति सम्मान नहीं है।
क्रोध के आवेग में आकर द्रौपदी ने घटोत्कच से कहा- "तुमने एक महारानी का अपमान किया है और अभिमानी होकर अपनी मर्यादा भूली है। जा! तेरी आयु बहुत कम होगी और तू बिना किसी युद्ध के अंत के, अकाल मृत्यु को प्राप्त होगा।"
भीम की विनती और श्राप का प्रभाव
जब भीम को इस श्राप का पता चला, तो उन्होंने द्रौपदी से क्षमा मांगी। द्रौपदी का क्रोध शांत हुआ, लेकिन दिया गया श्राप वापस नहीं लिया जा सकता था। हालांकि, बाद में इस श्राप को भगवान कृष्ण की लीला से जोड़कर देखा गया, क्योंकि घटोत्कच का वध धर्म की स्थापना के लिए जरूरी था। ताकि कर्ण की 'अमोघ शक्ति' का प्रयोग अर्जुन के बजाय घटोत्कच पर हो जाए।
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कृष्ण जानते थे कि:
* अगर घटोत्कच को यह श्राप न मिला होता और वह अमर रहता, तो कर्ण कभी अपनी अमोघ शक्ति का उपयोग उस पर नहीं करता।
* घटोत्कच की मृत्यु नियति ने इसलिए चुनी ताकि अर्जुन के प्राण बच सकें।
* श्रीकृष्ण ने बाद में घटोत्कच को सांत्वना दी थी कि भले ही उसकी आयु कम हो गई है, लेकिन युद्ध के इतिहास में उसका बलिदान सबसे महान माना जाएगा, क्योंकि उसने स्वयं को मिटाकर पांडव कुल की रक्षा की।
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