विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

महाभारत का वो शापित राजा, जो रास्ते के एक छोटे से विवाद के कारण बन गया था 'नरभक्षी' राक्षस!

Published: Sun, 26 Jul 2026 02:30 PM (GMT+05:30)

महाभारत के आदिपर्व में राजा कल्माषपाद की कथा है, जो ऋषि शक्ति के श्राप से नरभक्षी राक्षस बन गए थे ...और पढ़ें

ऋषि शक्ति का श्राप और राजा कल्माषपाद के राक्षस बनने की कहानी (Picture Credits- AI Image)

ऋषि शक्ति का श्राप और राजा कल्माषपाद के राक्षस बनने की कहानी (Picture Credits- AI Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पौराणिक ग्रंथों में ऐसी कई कथाएं दर्ज हैं, जो आज के युग में भी प्रसांगिक है। महाभारत के आदिपर्व में दर्ज उस राजा की कथा जो एक श्राप के कारण राक्षस के रूप में बदल गया है और कैसे यह कथा महाभारत से जुड़ी है। इस कथा को महाभारत काल में अंगारपर्ण नाम के एक गंधर्व ने पांडवों को सुनाया था।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश (सूर्यवंश) के प्रसिद्ध राजा कल्माषपाद, जो ऋषियों के श्राप से नरभक्षी राक्षस बन गए थे, और बाद में महर्षि वशिष्ठ की कृपा से इन्हें श्राप से मुक्ति मिली। किस श्राप से सूर्यवंश के इस राजा को राक्षस बनना पड़ा और कैसे इन्हें फिर से मनुष्य शरीर की प्राप्ति हुई? आइए पढ़ते हैं आदिपर्व से जुड़ी इस कथा के बारे में।

1

राजा कल्माषपाद और ऋषि शक्ति का श्राप 

आदि पर्व में एक प्रसंग आता है, एक शाम कल्माषपाद राजा शिकार करके वापस महल की तरफ लौट रहे थे। भूख और प्यास से व्याकुल राजा काफी थक चुके थे, इसलिए जल्द-जल्द महल पहुंचना चाहते थे। राजा चलते-चलते एक ऐसे मार्ग पर आ पहुंचे, जो काफी संकरा था। तभी राजा देखते हैं कि, सामने से ऋषि शक्ति आ रहे हैं, जो कि महर्षि वशष्टि के सबसे बड़े बेटे थे। वो रास्ता ऐसा था कि, एक बार में सिर्फ एक बात ही गुजर सकता था।

ऋषि शक्ति का मानना था कि, राज धर्म ऋषियों का सम्मान करना सिखाता है, अतः उन्हें पहले जाने का अधिकार होना चाहिए। लेकिन राजा भूख और प्यास से इतने व्याकुल थे कि, सोचने और समझने की क्षमता खत्म हो चुकी थी। उन्हें लगा कि, वो राजा है इसलिए उन्हें पहला अधिकार होना चाहिए। धीरे-धीरे राजा और शक्ति मुनि का बातचीत विवाद में बदल गई और गुस्से में राजा ने ऋषि शक्ति पर चाबुक से प्रहार कर दिया। इतने बड़े अपमान होने पर ऋषि शक्ति ने उन्हें श्राप दे दिया कि, राजा एक नरभक्षी राक्षस बन जाएगा। राजा ने उस दौरान ऋषि शक्ति की बातों को गंभीरता से नहीं लिया और शीघ्रता से महल लोट आए।

ऋषि शक्ति के श्राप के प्रभाव से राजा धीरे-धीरे राक्षस बनने लगा और राक्षिसी प्रवृत्ति उसके मन पर हावी होने लगी और उसी आवेग में आकर एक दिन राजा ने महल में आए एक ब्रह्माण को मांस परोस दिया। क्रोध में आकर ब्राह्माण ने भी यह श्राप दिया कि, राजा एक नरभक्षी में बदल जाएगा और उस दिन सच में राजा एक राक्षस में बदल गया। राक्षस बनने के बाद राजा वन में घूमने लगा और जो भी मनुष्य वन में जाता, वो उसे खा लेता था।

2

राजा कल्माषपाद अपने नए राक्षस स्वरूप के अंधकार में इतना डूब चुका था कि, उसने ने सिर्फ शक्ति मुनि बल्कि महर्षि वशिष्ठ के सभी पुत्रों का वध कर दिया। अपने पुत्रों को खोकर वशिष्ठ मुनि करुणा से भर उठे, लेकिन तभी उन्हें ज्ञात हुआ कि, उनकी बहू ऋषि शक्ति की पत्नी गर्भवती है और उन्हें जीवन के प्रति नई उम्मीद दिखी। एक दिन महर्षि वशिष्ठ अपनी पुत्रवधू के साथ उसी वन से गुजर रहे थे। भूख और प्यास से व्याकुल कल्माषपाद ने उन दोनों को देख लिया।

3

महर्षि वशिष्ठ ने कैसे दिलाई श्राप से मुक्ति

अगर महर्षि वशिष्ठ चाहते तो उसी समय कल्माषपाद का अंत कर सकते थे और अपनी सभी पुत्रों की मृत्यु का बदला ले सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा किया नहीं। उन्होंने अपने कमंडल से जल लिया और राजा कल्माषपाद को शक्ति मुनि के श्राप से मुक्त कर दिया। महर्षि जानते थे कि, इसमें कोई दो राय नहीं है कि, कल्माषपाद राजा ने अपराध किया लेकिन गुस्से के आवेग में ऋषि शक्ति ने भी जरूरत से अधिक दंड राजा को दिया, जो आखिर में उन्हीं के लिए पीड़ादायक परिणाम रहा।

महर्षि वशिष्ठ ने ऐसा किया क्योंकि, आने वाली पीढ़ियां क्रोध और घृणा के जाल में न फंसे, क्योंकि तब उनके पुत्रवधू के गर्भ में पल रहे थे ऋषि पराशर, जो आगे चलकर वेद व्यास जी के पिता बने। वेद व्यास जिन्होंने लिखी गुस्से, ईर्ष्या, बदला और रक्तपात से जन्में धर्म के सबसे बड़े संघर्ष की कहानी महाभारत।

4

यह भी पढ़ें- श्रीराम से पहले इक्ष्वाकु वंश के किस राजकुमार को मिला था वनवास, जानें पूरी कथा

यह भी पढ़ें- 'मेरा गुस्सा बहुत बुरा है', अगर आप भी इसे अपनी ताकत मानते हैं; तो रामचरितमानस की यह चौपाई बदल देगी आपकी सोच

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।