क्या शकुनि अकेले था कौरवों के विनाश का कारण? पढ़िए महाभारत से जुड़े इन मिथकों की सच्चाई
महाभारत से जुड़े कई मिथक सदियों से प्रचलित हैं, जो असल महाकाव्य से भिन्न हैं। कर्ण, कृष्ण, अभिमन्यु और अन्य पात्रों से संबंधित ऐसी ही मिथकों के बारे म ...और पढ़ें

महाभारत महाकाव्य के मिथक कर्ण से लेकर अभिमन्यु तक (Picture Credits- AI Image)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत के बारे में हमने जो कुछ भी सुना है, वह सब असल में महाकाव्य में देखने को नहीं मिलता है। सदियों से कहानियों के प्रचलित रूपों, टीवी पर दिखाएं गए वर्जन और सोशल मीडिया ने सच और कल्पना के बीच के फर्क को धुंधला कर दिया है। आइए जानते हैं महाभारत से जुड़े उन मिथकों के बारे में जिनपर अधिकतर लोग भरोसा करते हैं।
कर्ण सबसे बड़ा पांडव था
कर्ण कुंती का सबसे बड़ा बेटा था, लेकिन वह कभी पांडवों में से नहीं था। उसका जन्म सूर्य देव के आशीर्वाद से हुआ था, न कि राजा पांडु और कुंती के मिलन से, इसलिए वह माता कुंती का पुत्र तो था, लेकिन पांडवों में सबसे बड़ा नहीं था। कर्ण को धृतराष्ट्र के सारथी अधिरथ और उनकी पत्नी राधा ने पाला था, जो आगे चलकर कौरवों के सहयोगी बने थे।
कृष्ण ने युद्ध के दौरान वाता तोड़ा
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने हथियार न उठाने की कसम खाई थी। वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर बढ़े, उन्होंने असल में कोई हथियार इस्तेमाल नहीं किया था, और अर्जुन ने उन्हें रोक दिया।
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मां के गर्भ में अभिमन्यु को चक्रव्यूह का ज्ञान
अभिमन्यु के बारे में कहा जाता है कि, उन्होंने अपनी मां के गर्भ में रहकर ही चक्रव्यूह के बारे में जान लिया था। लेकिन सच तो यह है कि, उन्हें फॉर्मेशन में घुसने की ट्रेनिंग खुद अर्जुन ने दी थी, लेकिन उन्होंने कभी उससे बाहर निकलने की कला नहीं सीखी।
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विदुर पांडवों का समर्थन करते थे।
महाभारत काल में विदुर को लेकर कहा जाता है कि, उन्होंने पांडवों का साथ दिया था, जबकि उन्होंने किसी भी पक्ष का साथ नहीं दिया था। उन्होंने धर्म का साथ निभाया। जब भी पांडव और कौरव धर्म से भटके उन्होंने दोनों की ही अलोचना की।
शकुनि ने कुरु वंश को नष्ट कर दिया।
शकुनि दुर्योधन का मामा था। शकुनि को लेकर कहा जाता है कि, उसके कारण ही कौरवों का पतन हुआ, जबकि इस पतन के पीछे कई किरदार थे, जिसमें धृतराष्ट्र का पुत्र मोह और दुर्योधन का घमंड भी शामिल था।
कृष्ण ने हर युद्ध जीतने के लिए चमत्कारों का प्रयोग किया।
महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका अहम थी, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन कृष्ण जी मुख्य रूप से ज्ञान, रणनीति, कूटनीति, प्रैक्टिकल सोच और धर्म की अच्छी समझ रखते थे। युद्ध को जितना के लिए दैवीय शक्ति कभी भी उनका पहला समाधान नहीं था।
भीष्म ने दुर्योधन के लिए लड़ाई लड़ी
भीष्म पितामह ने कुरु राजगद्दी के लिए अपनी कसम की वजह से लड़ाई लड़ी, इसलिए नहीं कि उन्हें लगता था कि दुर्योधन नेक है। उनकी वफादरी अपने कसम के कर्तव्य के प्रति थी।
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