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    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर करें ये अचूक उपाय, खुद चंद्रमा देंगे आपको मानसिक शांति!

    Updated: Thu, 12 Feb 2026 02:06 PM (IST)

    महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) इस साल 15 फरवरी को मनाई जाएगी। यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरने का एक बड़ा अवसर है। यह पर्व ग्रहों की चाल और ग्रहण क ...और पढ़ें

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के उपाय। (Ai Generated Image)

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के उपाय। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. इस साल 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी

    2. महाशिवरात्रि पर शिव पूजा का विधान है

    3. महाशिवरात्रि पर पूजा-पाठ का विधान है

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। जब आकाश में ग्रहों की चाल बदलती है और ग्रहण जैसी घटनाएं होती हैं, तो उनका सीधा असर हमारे मन और भाग्य पर पड़ता है। इस साल 15 फरवरी 2026 को आने वाली महाशिवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि अपने जीवन को नई सकारात्मक ऊर्जा से भरने का बहुत बड़ा मौका है। शिव तत्व वह \शक्ति है जिसमें ब्रह्मांड के सभी ग्रह और नक्षत्र समाये हुए हैं।

    शास्त्रों के अनुसार महादेव की शरण में आने से ग्रहों की टेढ़ी चाल भी सीधी हो जाती है। यह पावन रात्रि हमें सिखाती है कि कैसे भगवान शिव की भक्ति हमारे जीवन पर छाए ग्रहण के काले साये को मिटाकर सौभाग्य और खुशियों का नया सवेरा ला सकती है।

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    ग्रहण का प्रभाव और महादेव की दिव्य शक्ति

    ज्योतिष के अनुसार, सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय प्रकृति में ऊर्जा का संतुलन थोड़ा बिगड़ जाता है, जिससे मनुष्य के मन में बेचैनी बढ़ सकती है। ग्रहण के दौरान राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसे शुभ नहीं माना जाता। भगवान शिव ने संसार को बचाने के लिए हलाहल विष का पान किया था, इसलिए वे हर तरह की नकारात्मक शक्ति को खत्म करने में सक्षम हैं। मान्यता है कि जो भक्त महाशिवरात्रि के दिन शिव साधना करता है, उस पर ग्रहण के दौरान लगने वाले सूतक या किसी भी अशुभ छाया का बुरा असर नहीं पड़ता। 

    राहु-केतु के दोषों से मुक्ति का मार्ग

    ज्योतिष में राहु और केतु को ग्रहण का मुख्य कारण माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में ग्रहण दोष होता है, उन्हें अक्सर मानसिक तनाव, काम में रुकावट और स्वास्थ्य संबंधी छोटी-मोटी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शिव पुराण के अनुसार, महादेव ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो इन छाया ग्रहों के बुरे प्रभाव को पूरी तरह नियंत्रित कर सकते हैं।

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    महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का शुद्ध जल या दूध से अभिषेक करने और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करने से ये दोष धीरे-धीरे शांत होने लगते हैं। यह पावन रात्रि हमें अपने भीतर के डर को खत्म करने और आत्मबल बढ़ाने की प्रेरणा देती है।

    चंद्रमा की पीड़ा और शिव पूजा का महत्व

    ग्रहण का सबसे ज्यादा असर चंद्रमा पर पड़ता है और चंद्रमा का सीधा संबंध हमारे मन से होता है। जब भी चंद्र ग्रहण जैसी स्थिति बनती है, तो लोगों में मानसिक उलझन और भ्रम बढ़ जाता है। भगवान शिव के मस्तक पर स्वयं चंद्रमा विराजमान हैं, इसलिए उन्हें 'चंद्रशेखर' भी कहा जाता है। महाशिवरात्रि पर महादेव की आराधना करने से कमजोर चंद्रमा को नई ताकत मिलती है और व्यक्ति को मानसिक शांति महसूस होती है।

    यदि किसी की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या वह अक्सर उदास रहता है, तो शिवरात्रि का व्रत और महादेव की पूजा करना उसके लिए बहुत शुभ साबित होता है। इस दिन महादेव की पूजा करने से मन एकाग्र होता है और जीवन में स्थिरता आती है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।