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    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भूलकर भी शिव जी को न चढ़ाएं ये चीजें, वरना नाराज हो जाएंगे महादेव

    Updated: Sun, 08 Feb 2026 12:07 PM (IST)

    महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मात ...और पढ़ें

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के नियम। (Ai Generated)

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के नियम। (Ai Generated)

    HighLights

    1. महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्तों के लिए बहुत खास होता है

    2. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था

    3. इस दिन पूजा-पाठ और व्रत का विधान है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्तों के लिए साल का सबसे बड़ा दिन होता है। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह पर्व इस साल 15 फरवरी को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शिव जी बेहद भोले हैं, जो मात्र एक लोटा जल और बिल्व पत्र से अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन शास्त्र के अनुसार उनकी पूजा में कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें भूलकर भी शामिल नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं।

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    तुलसी दल

    भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल नहीं शामिल करना चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने देवी तुलसी यानी (वृंदा) के पति जालंधर का वध किया था, जिसके बाद तुलसी जी ने शिव जी को अपनी पूजा में शामिल न होने का श्राप दिया था। इसलिए शिवलिंग पर कभी भी तुलसी दल न चढ़ाएं।

    केतकी के फूल

    शास्त्रों के अनुसार, केतकी के फूल ने ब्रह्मा जी के एक झूठ में उनका साथ दिया था, जिससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने केतकी को श्राप दिया था कि उनकी पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का उपयोग नहीं किया जाएगा। महादेव को बिल्व पत्र, धतूरा और मंदार के फूल बहुत प्रिय हैं।

    सिंदूर या कुमकुम

    सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक है और महिलाएं इसे अपने पति की लंबी उम्र के लिए लगाती हैं। भगवान शिव वैरागी माने जाते हैं, इसलिए उनके प्रतीक शिवलिंग पर सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता। शिव जी को आप भस्म या चंदन का तिलक लगा सकते हैं।

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    हल्दी

    हल्दी का संबंध स्त्री सौंदर्य से माना गया है, जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व शिव जी का प्रतीक है। यही वजह है कि महादेव की पूजा में हल्दी का प्रयोग नहीं किया जाता। हालांकि, माता पार्वती की मूर्ति पर आप हल्दी अर्पित कर सकते हैं।

    शंख से जल अर्पित करना

    भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, जिसका प्रतीक शंख माना जाता है। इसलिए भगवान शिव का शंख से अभिषेक नहीं करना चाहिए। महादेव का अभिषेक हमेशा तांबे या चांदी के लोटे से करना चाहिए।

    खंडित अक्षत

    शिव पूजा में अक्षत का बहुत महत्व है, लेकिन वे टूटे हुए नहीं होने चाहिए। अक्षत का मतलब ही है अक्षत यानी जो खंडित न हो। टूटे हुए चावल अपूर्णता का प्रतीक हैं, इसलिए हमेशा साफ और साबुत चावल ही चढ़ाएं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।