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    Mahashivratri Katha: महाशिवरात्रि के दिन करें इस कथा का पाठ, महादेव की कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    Updated: Sun, 15 Feb 2026 10:37 AM (GMT+05:30)

    यह लेख 15 फरवरी को मनाए जा रहे महाशिवरात्रि पर्व के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इसमें चित्रभानु नामक शिकारी ...और पढ़ें

    महाशिवरात्रि के दिन जरूर करें इस कथा का पाठ (Image Source: AI-Generated)

    महाशिवरात्रि के दिन जरूर करें इस कथा का पाठ (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस शुभ अवसर पर साधक शिव-शक्ति की पूजा-अर्चना करते हैं और मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए व्रत भी किया जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव पूजा करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है और माहदेव की कृपा प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत कथा का पाठ करने से साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। आइए पढ़ते हैं महाशिवरात्रि की कथा।lord shiv  (1)

    महाशिवरात्रि की व्रत कथा (Mahashivratri Katha in Hindi)

    पौराणिक कथा के अनुसार, चित्रभानु नाम का एक शिकारी था। एक बार ऐसा समय कि उसपर कर्ज बढ़ गया। कर्ज को न चुकाने पर साहुकार ने उसे शिवरात्रि के दिन बंदी बना लिया। शिकारी ने भगवान शिव का ध्यान किया। वह जंगल में शिकार के लिए निकला, लेकिन उसे कुछ नहीं मिला। वह बेलपत्र के पेड़ पर चढ़ गया। शिवलिंग सूखे पत्तों से ढका हुआ था और शिकारी को दिखाई नहीं दे रहा था।

    पेड़ पर बैठे-बैठे उसको नींद आने लगी। ऐसे में खुद को जगाए रखने के लिए शिकारी बेल के पत्ते तोड़कर नीचे गिराने लगा। पेड़ बैठे- बैठे उससे शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित हो गए। उसकी महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर की पूजा पूरी हो गई।

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    कुछ समयके बाद तालाब पर एक गर्भिणी हिरनी पानी पीने आई। उसे देख शिकारी ने धनुष-बाण से उसपर निशाना साधा। ऐसे में हिरणी ने शिकारी से विनती की कि हे व्याध! मैं गर्भिणी हूं और जल्द ही प्रसव करने वाली हूं। शिकारी को हिरणी पर दया आ गई। इस दौरान उससे अनजाने में बेलपत्र गिर गए और दूसरे प्रहर की पूजा हो गई।

    कुछ समय के बाद एक और हिरणी आई और शिकारी ने उसपर निशाना साधा। हिरणी ने कहा कि जंगल में अपनी पति को खोज रही हूं। एक बार मुझे अपने पति से मिलने दो और उसके बाद मैं उनसे मिलकर वापस तुम्हारे पास आ जाऊंगी। उसने हिरणी को जाने दिया। इस दौरान उससे अनजाने से बेलपत्र और जल गिरा। तीसरे प्रहर की पूजा पूरी हो गई।

    सुबह के दौरान एक हिरण परिवार अपने परिवार के साथ शिकारी के पास। हिरण के परिवार को शिकारी खुश हुआ। ऐसे में उसने उसने बाण चढ़ाया। हिरण ने कहा कि हे शिकारी! अगर तुमने मुझसे पहले आने वाली हिरनियों को मार दिया है, तो मुझे भी मार डालो ताकि मेरा दुख खत्म हो। मुझे भी कुछ पल का जीवनदान दो शिकारी ने हिरण परिवार को जीवनदान दे दिया और शिवरात्रि व्रत एवं पूजा करने से चित्रभानु को मोक्ष मिला और शिवलोक की प्राप्ति हुई।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।