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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 22, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Mandala Puja 2023: इस दिन होगी मंडला पूजा, जानें महत्व और पूजा विधि

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Fri, 22 Dec 2023 12:56 PM (GMT+05:30)

    Mandala Puja 2023 मंडला पूजा और मकर विलक्कू सबरीमाला अयप्पा मंदिर में आयोजित होने वाले दो सबसे प्रसिद्ध आयोजन हैं। इस दौरान लोग दूर-दूर से दर्शन के लि ...और पढ़ें

    Mandala Puja 2023: मंडला पूजा का महत्व
    Mandala Puja 2023: मंडला पूजा का महत्व

    HighLights

    1. मंडला पूजा एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।
    2. मंडला पूजा 41 दिनों की लंबी तपस्या के अंत का प्रतीक है।
    3. इस साल यह पर्व 27 दिसंबर को मनाया जाएगा।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली।Mandala Puja 2023: मंडला पूजा एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह पर्व केरल के सबरीमाला अयप्पा मंदिर में मनाया जाता है। यह पूजा 41 दिनों की लंबी तपस्या के अंत का प्रतीक है, जिसे मंडला कलाम के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार भगवान अयप्पा के भक्तों द्वारा बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 27 दिसंबर, 2023 को मनाया जाएगा।

    मंडला पूजा का महत्व

    मंडला पूजा और मकर विलक्कू सबरीमाला अयप्पा मंदिर में आयोजित होने वाले दो सबसे प्रसिद्ध आयोजन हैं। इस दौरान लोग दूर-दूर से दर्शन के लिए जाते हैं। मंडला पूजा के दिनों में मंदिर भक्तों के लिए पूरे दिन खुला रहता है। मंडल पूजा का महत्व कई पुराणों में बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि केवल मंडला पूजा से ही व्यक्ति का जीवन पूरी तरह से बदल सकता है।

    इस पूजा में उम्र और लिंग की परवाह किए बिना कोई भी व्यक्ति कर सकता है। जो लोग इस दौरान भक्ति भाव के साथ पूजा अर्चना करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    मंडला पूजा विधि

    • मंडला पूजा का व्रत रखें।
    • मंडला पूजा के दौरान पवित्र और सरल जीवन जीने का पालन करें।
    • जो जातक इन दिनों व्रत रखते हैं उन्हें अपने शरीर के साथ-साथ मन को भी साफ रखना चाहिए।
    • भक्तों को 41 दिनों की अवधि के दौरान सांसारिक सुखों से दूर रहना चाहिए।
    • शराब और धूम्रपान के सेवन से बचना चाहिए।
    • प्रतिदिन दो बार प्रार्थना करनी चाहिए।
    • इस दौरान भक्त ज्यादातर काली धोती पहनते हैं और भगवान अयप्पा को 'इरुमुदी' चढ़ाते हैं।
    • कुछ भक्त इस दौरान बिस्तर पर सोने से बचने और नंगे पैर मंदिर तक जाने का संकल्प भी लेते हैं।
    • इस व्रत के दौरान दान-पुण्य पर भी जोर दिया जाता है।

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