मेष संक्रांति 2026: सूर्य को अर्घ्य देने से बढ़ता है मान-सम्मान, लेकिन जल देते समय न करें ये एक गलती
जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि यानी मेष में प्रवेश करते हैं, तो इसे मेष संक्रांति कहते हैं। इस साल 14 अप्रैल को मेष संक्रांति मनाई जाए ...और पढ़ें
-1775905619412_m.webp)
मेष संक्रांति पर सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
14 अप्रैल को सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे
सूर्य देव को अर्घ्य देने से बढ़ता है मान-सम्मान
सूर्य देव को अर्घ्य देते समय बिल्कुल न करें ये गलती
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में सूर्य देव को 'ग्रहों का राजा' कहा गया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति रोजाना सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य देता है, उसकी कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इसके प्रभाव से न सिर्फ समाज में मान-सम्मान बढ़ता है, बल्कि करियर व नौकरी में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं। मेष संक्रांति के शुभ दिन पर आप इस शास्त्र-सम्मत विधि से सूर्य देव को अर्घ्य देकर उनकी विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
सूर्य देव अर्घ्य देने की विधि
- मेष संक्रांति पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- तांबे के लोटे में शुद्ध जल डालें और इसमें थोड़ा-सी रोली, लाल रंग के फूल और अक्षत डालें।
- अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं और लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर अपने सिर के ऊपर तक ले जाएं।
- जल की गिरती हुई धार के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें।
- जल अर्पित करते समय लगातार "ॐ सूर्याय नम:" या "ॐ घृणि सूर्याय नम:" मंत्र का जप करते रहें।
- जल अर्पित करने के बाद अपने ही स्थान पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें।
- अंत में हाथ जोड़कर सूर्य देव को प्रणाम करें और अपने सुख-समृद्धि की कामना करें।
जरूर ध्यान रखें ये बातें
अर्घ्य देते समय इस बात का ध्यान रखें कि जल के छींटे आपके पैरों पर न पड़ें। ऐसे में आप नीचे कोई खाली गमला या पात्र रख सकते हैं, ताकि जल उसी में गिरे। इसके साथ ही हमेशा सूर्य को अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि इस धातु को सूर्य देव से जोड़कर देखा जाता है।
जरूर करें ये काम
मेष संक्रांति पर पवित्र नदी जैसे गंगा आदि में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलकार स्नान करें। अब सूर्य देव को अर्घ्य दें और इस मंत्र का जप करें -
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर।।
इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान से पूजा करें। अंत में आरती करते हुए भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों व जरुरतमंद लोगों को पीली दाल, हल्दी और पीले रंग के कपड़ों को दान करें।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें - Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति पर करें पितरों की पूजा, जानिए इसका धार्मिक महत्व
यह भी पढ़ें - मेष संक्रांति के साथ बन रहा अशुभ 'वैधृति योग', 14 अप्रैल से इन 3 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।