मेष संक्रांति पर सूर्य देव का महापरिवर्तन, सोई किस्मत जगाने के लिए इस तरह दें अर्घ्य
जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं, तो इसे मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। यह सौर नववर्ष का प्रारंभ भी है। ...और पढ़ें
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मेष संक्रांति पर इस तरह दें अर्घ्य (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
मेष संक्रांति पर सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें
मेष संक्रांति पर शुभ माना गया है स्नान-दान करना
सफलता प्राप्ति के लिए काम आ सकते हैं ये खास उपाय
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में संक्रांति को दान, पुण्य और उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। 14 अप्रैल को मेष संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन पर खरमास की भी समाप्ति होती है। इस दिन पर आप कुछ विशेष उपायों द्वारा सूर्य देव की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं, जो न केवल सूर्य देव को प्रसन्न करते हैं, बल्कि आपके जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सौभाग्य का संचार भी करते हैं।
इस तरह दें सूर्य देव को अर्घ्य
सबसे पहले सुबह सूर्योदय से पहले उठकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। इसके बाद लाल या नारंगी रंग के कपड़े पहनें। सूर्योदय के समय एक तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल, कुमकुम, अक्षत और थोड़े काले तिल डालें।
अब हाथ में लोटा लेकर दोनों हाथों को अपने सिर से ऊपर ले जाएं और अर्घ्य दें। इस दौरान ॐ घृणि सूर्याय नमः या ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः मंत्र का जप करत रहें। साथ ही सुख-समृद्धि की कामना करें।

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जरूर करें ये काम
- मेष संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान का बहुत महत्व है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- किसी जरुरतमंद को पानी से भरा मिट्टी का घड़ा जरूर दान करें। आप इसमें थोड़ा-सा गुड़ भी डाल सकते हैं, जो बहुत शुभ माना जाता है।
- मेष संक्रांति को सत्तू संक्रांति भी कहा जाता है। ऐसे में इस दिन पर सत्तू का सेवन करना और दान करना दोनों ही विशेष रूप से फलदायी माने गए हैं।
- इस दिन गाय को गुड़ और भीगी हुई चने की दाल जरूर खिलाएं। इससे कुंडली के दोष शांत होते हैं।
करें ये उपाय
मेष संक्रांति के दिन सूर्य को जल अर्पित करने के बाद आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ जरूर करें। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, जिससे जातक को करियर और कारोबार में मन मुताबिक सफलता मिलती है। साथ ही यह पाठ आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए भी सहायक साबित होती है।
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साथ ही आप मेष संक्रांति सूर्य देव की कृपा प्राप्ति के लिए आप सूर्यदेव के मंत्रों के साथ-साथ और सूर्याष्टकम का भी पाठ कर सकते हैं। इससे जातक पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है और उसे जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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रखें इन बातों का ध्यान
मेष संक्रांति के विशेष मौके पर सूर्य देव को अर्घ्य देते समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान भी जरूर रखें, तभी आपको शुभ फल मिल सकते हैं। सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का ही इस्तेमाल करें। इस बात का भी ध्यान रखें कि जल अर्पित करते समय जल आपके पैरों पर न गिरे।
सूर्य देव को इस तरह जल अर्पित करें कि वह किसी पात्र या गमले में गिरे। साथ ही अर्घ्य देते समय जल की पतली धारा से सूर्य देव दिखाई देने चाहिए। अगर आप इन बातों का ध्यान रखने हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तो इससे आपको जल अर्पित करने का पूरा लाभ मिलता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।