सतुआ संक्रांति 2026: कब है सतुआन पर्व, क्यों किया जाता है सत्तू का दान? जानिए धार्मिक महत्व
साल 2026 में कब मनाई जाएगी सतुआ संक्रांति? पढ़ें गर्मी के इस पहले त्योहार की सही तारीख, सत्तू के दान का महत्व और इससे जुड़ी खास परंपराएं। ...और पढ़ें

सतुआ संक्रांति 2026 पर करें इन चीजों का दान (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जैसे ही चैत्र का महीना (Chaitra Month) खत्म होता है और वैशाख की दस्तक होती है, उत्तर भारत, खासकर बिहार और यूपी के घरों में सत्तू की खुशबू महकने लगती है। इसे हम 'सतुआन' या 'सतुआ संक्रांति'(Satua Sankranti 2026) के नाम से जानते हैं। यह सिर्फ एक खाने-पीने का त्योहार नहीं है, बल्कि बदलते मौसम के साथ तालमेल बिठाने का आध्यात्मिक तरीका भी है।
साल 2026 में सतुआन यानी मेष संक्रांति 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य देव मीन राशि (Meen Rashi) को छोड़कर अपने उच्च पद यानी मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सौर नववर्ष (Solar New Year) की शुरुआत भी मानी जाती है।
सतुआन के दिन क्या करना है सबसे जरूरी? (Satuan Rituals)
इस दिन की परंपराएं बहुत ही सरल और दिल को सुकून देने वाली हैं। यहां कुछ खास बातें हैं जो आपको इस दिन जरूर करनी चाहिए:
- पवित्र स्नान और अर्घ्य: सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद उगते सूर्य को जल चढ़ाएं।
- सत्तू का भोग और सेवन: सत्तू को सीधे खाने से पहले भगवान को भोग लगाएं। सतुआन के दिन सत्तू के साथ गुड़ और कच्ची कैरी (आम का टिकोरा) खाने का रिवाज है। यह शरीर को ठंडक देता है।
- घड़े का पूजन: इस दिन मिट्टी का नया घड़ा (सुराही) लाकर उसे जल से भरें, उस पर कलावा बांधें और उसकी पूजा करें। यह घर में बरकत लाता है।
- पितरों का तर्पण: माना जाता है कि सतुआन के दिन पितरों के नाम से सत्तू और जल दान करने से उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है।
दान का 'महामुहूर्त' और फल
सतुआ संक्रांति पर दान का फल कभी खत्म नहीं होता। इसलिए, इसे 'अक्षय' फलदायी माना जाता है। इस दिन ऐसी चीजों का दान करें जो गर्मी में राहत दें:
- मिट्टी का नया घड़ा
- सत्तू और गुड़
- हाथ वाला पंखा
- चप्पल या छाता
शास्त्रों के नियम
सतुआ संक्रांति के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व का वर्णन 'निर्णयसिंधु' और 'धर्मसिंधु' जैसे शास्त्रों में मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार, जब सूर्य मेष राशि में आता है, तो वह समय 'महापुण्यकाल' होता है। साथ ही, आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में भी सत्तू को इस मौसम का सबसे उत्तम आहार बताया गया है।
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