क्या होता है मृत्यु पंचक? जून में बनने जा रहे इस अशुभ योग का शनि देव से क्या है कनेक्शन?
जून 2026 में लगने वाला मृत्यु पंचक जो 6 जून से शुरू होकर 11 जून तक रहेगा। यह अवधि शनि देव से संबंधित मानी जाती है और इस दौरान शुभ कार्यों से बचने की स ...और पढ़ें

जून 2026 में मृत्यु पंचक (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में लोग किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले मुहूर्त का खास ध्यान रखते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे समय के बारे में बताया गया है, जब किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाते हैं। इन्हीं में से एक अशुभ समय है मृत्यु पंचक।
जून 2026 में भी पंचक लगने जा रहा है, इसे मृत्यु पंचक नाम दिया गया है। ज्योतिष नजरिए से यह समय काफी संवेदनशील माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान किए गए शुभ कार्यों के परिणाम जीवन में बेवजह का तनाव बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं मृत्यु पंचक क्या है, शनि देव से इसका क्या कनेक्शन है और इस दौरान किन चीजों में सावधानी बरतनी चाहिए?
जून में इस दिन लग रहा है मृत्यु पंचक
वैदिक पंचांग के मुताबिक, जून 2026 यानी इस महीने मृत्यु पंचक की शुरुआत 6 जून को शाम 7 बजकर 03 मिनट पर होगी, जो 11 जून गुरुवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी।
इस बार पंचक शनिवार से शुरू हो रहा है, जिस वजह से इसे मृत्यु पंचक का नाम दिया गया है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि, शनिवार का संबंध शनिदेव से होता है। ऐसे में पंचत अवधि के दौरान किए गए कामों के प्रभाव को लेकर लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
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अगर पंचक की शुरुआत सोमवार से हो तो उसे राज पंचक, मंगलवार से शुरू होने वाले पंचक को अग्नि और शनिवार को शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु कहा जाता है।
मृत्यु पंचक क्यों हैं खास?
ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक, पंचक काल में किए गए कामों का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इसी वजह से इस अवधि को लेकर खास सावधानी बरतनी चाहिए। मृत्यु पंचक के दौरान शादी, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, नया व्यापार शुरू करना या छत डालने जैसे मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए।
ऐसा इसलिए क्योंकि पंचक के दौरान शुभ कार्यों को करने से काम में रुकावटें, देरी या अनचाही समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पंचक और शनि का संबंध
इस बार पंचक 6 जून 2026 शनिवार के दिन से शुरू हो रहा है, जिस वजह से इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र में शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है।
मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान व्यक्ति को जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय नहीं लेना चाहिए। न ही बड़े निवेश, आर्थिक फैसले या जोखिम भरे कार्यों को करना चाहिए।
पंचक के दौरान क्या करें और क्या नहीं?
मृत्यु पंचक के दौरान धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने के साथ मंत्र-जाप, दान और सेवा से जुड़े कार्यों को करना चाहिए।
पंचक के दौरान अंतिम संस्कार, दक्षिण दिशा की ओर यात्रा, लकड़ी तोड़ना, दुकान या मकान की छत नहीं डालवानी चाहिए। इसके अलावा खाट, चरपाई को बुनना भी अशुभ माना जाता है।
अगर पंचक के दौरान कोई खास कार्य करने की आवश्यकता हो, तो विद्वान को पूछकर पंचक शांति के बाद ही काम करना चाहिए।
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