विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कितने तरह के होते हैं पंचक और कैसे तय होते हैं नाम? जानें कौन-सा है शुभ और कौन अशुभ

Published: Thu, 04 Jun 2026 02:27 PM (GMT+05:30)

ज्योतिष शास्त्र में पंचक का विशेष महत्व है, जो चंद्रमा के पांच नक्षत्रों से गुजरने पर बनता है। यह लेख ...और पढ़ें

पंचक के प्रकार: जानें कौन सा पंचक है शुभ और कौन सा अशुभ (Picture Credit- AI Generated)

पंचक के प्रकार: जानें कौन सा पंचक है शुभ और कौन सा अशुभ (Picture Credit- AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी काम को करते समय सही मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की चाल का खास ख्याल रखा जाता है। सनातन धर्म में 'समय' का मतलब सिर्फ घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि ग्रहों और नक्षत्रों की बदलती चाल भी है। 

हमने अक्सर घर के बड़े-बुजुर्गों को यह कहते सुना होगा कि "कोई भी नया या शुभ काम करने से पहले मुहूर्त जरूर देख लेना चाहिए।" ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ नक्षत्र जीवन में जहां खुशियां और सफलता लेकर आते हैं, वहीं कुछ नक्षत्र ऐसे भी होते हैं, जिनमें कुछ खास कामों को करने की सख्त मनाही होती है। इन्हीं में से एक 'पंचक' है। आइए आज इस आर्टिकल में आपको बताते हैं क्या होते हैं पंचक और इसके कितने प्रकार होते हैं। साथ ही जानेंगे इसके नाम कैसे तय किए जाते हैं। 

क्या होता है पंचक?

जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तो उस पांच दिनों के समय को पंचक कहा जाता है। आम तौर पर लोग पंचक का नाम सुनते ही डर जाते हैं कि यह समय हमेशा नुकसानदेह ही होगा, लेकिन सच यह है कि पंचक शुरू होने वाले दिन के आधार पर पांच अलग-अलग प्रकार के होते हैं, जिनमें से कुछ बेहद शुभ भी माने जाते हैं। 

रोग पंचक 

अगर पंचक की शुरुआत रविवार के दिन से होती है, तो ज्योतिष शास्त्र में इसे 'रोग पंचक' कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही साफ है, यह समय सेहत के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इन पांच दिनों में व्यक्ति को शारीरिक कष्ट या मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि इस दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों की शुरुआत नहीं की जाती है।

राज पंचक 

सोमवार या बुधवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को 'राज पंचक' कहा जाता है। यह बेहद शुभ और लाभकारी माना जाता है। इस अवधि में किए गए कार्यों से व्यक्ति को जीवन में मान-सम्मान, पद और प्रतिष्ठा मिलती है। सरकारी कामकाज, नौकरी में बड़े फैसले या जमीन-जायदाद से जुड़े सौदों के लिए यह पांच दिन बहुत उत्तम साबित होते हैं।

अग्नि पंचक 

जब पंचक की शुरुआत मंगलवार या गुरुवार से होती है, तो इसे 'अग्नि पंचक' कहा जाता है। इस दौरान नया निर्माण कार्य शुरू करने, नई मशीनरी खरीदने या औजारों का इस्तेमाल करने की मनाही होती है, क्योंकि इसमें दुर्घटना या नुकसान का खतरा रहता है। हालांकि, कोर्ट-कचहरी के मामलों या किसी विवाद को सुलझाने के लिए इस समय का इस्तेमाल किया जा सकता है।

मृत्यु पंचक (शनिवार)

शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को 'मृत्यु पंचक' कहा जाता है और इसे ज्योतिष में सबसे ज्यादा खतरनाक माना गया है। इन पांच दिनों के दौरान किसी भी तरह के जोखिम भरे काम, यात्रा या एडवेंचर्स से पूरी तरह बचना चाहिए। इस दौरान दुर्घटना और भारी नुकसान की आशंका काफी बढ़ जाती है, इसलिए सावधानी रखना ही बेहतर है।

चोर पंचक (शुक्रवार)

शुक्रवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को 'चोर पंचक' कहा जाता है। इस समय में धन की हानि, धोखा या चोरी होने का डर सबसे ज्यादा रहता है। यही कारण है कि शास्त्रों में इस दौरान किसी भी तरह के बड़े आर्थिक लेन-देन, व्यापारिक सौदे, नया निवेश करने या लंबी दूरी की यात्रा पर जाने की मनाही की गई है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।