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    गणेश जी की पूजा में छिपा है राजराजेश्वर योग का रहस्य, रिद्धि-सिद्धि के दाता खोलेंगे भाग्य के द्वार

    Updated: Thu, 08 Jan 2026 07:00 PM (IST)

    सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश (Ganpati-Auspiciousness) को समर्पित है, जिनकी पूजा से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सुख-समृद्ध ...और पढ़ें

    भगवान गणेश को कैसे प्रसन्न करें?

    भगवान गणेश को कैसे प्रसन्न करें?

    HighLights

    1. सनातन धर्म में भगवान गणेश प्रथम पूजनीय हैं।

    2. भगवान गणेश की पूजा से सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    3. हर बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन भगवान गणेश की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। भगवान गणेश की पूजा करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है। बुध देव की कृपा से जातक अपने जीवन में उन्नति की राह पर अग्रसर रहता है।

    ganesh ji

    धार्मिक मत है कि भगवान गणेश के भक्तों को जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती है। व्यक्ति को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त संकटों से मुक्ति मिलती है।

    ज्योतिषियों की मानें तो भगवान गणेश की पूजा करने से राजराजेश्वर राजयोग का वरदान मिलता है। इस योग की प्राप्ति से व्यक्ति राजाओं के समान जीवन जीते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि राजराजेश्वर का वरदान (Rajrajeshwar Varadan) कैसे मिलता है? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

    कैसे मिलता है वरदान?

    गणेश पुराण में वर्णित है कि एक बार राजा कर्दम वन विहार के समय महर्षि भृगु के आश्रम पहुंचे। वहां, उन्होंने अपने सुख और वैभव के बारे में महर्षि भृगु से पूछा। तब महर्षि भृगु ने कहा कि हे राजन! यकीनन आपको यह सुख और वैभव इस जन्म का फल नहीं है, अपितु पिछले जन्म का फल है।

    आपने पिछले जन्म में भगवान गणेश के निमित्त एकाक्षरी मंत्र का अनुष्ठान किया था। इसके परिणाम स्वरूप आपको यह वरदान मिला है। पिछले जन्म में आप क्षत्रिय के घर में पैदा हुए थे। आपकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। आपको अपने जीवन में संघर्षों का सामना करना पड़ा। अत्यंत दुख से कुंठित होकर आपने एक बार प्राण त्यागने का प्रयास भी किया था।

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    उस समय आपकी भेंट सौभरि ऋषि से हुई। उन्होंने आपको भगवान गणेश के निमित्त एकाक्षरी मंत्र का अनुष्ठान करने की सलाह दी। आपने सौभरि ऋषि के वचनों का पालन किया और भगवान गणेश की पूजा की। इस अनुष्ठान के सफल होने से न केवल आपको शेष जीवन में सुख मिला, बल्कि इस जन्म में आपको राजराजेश्वर का वरदान मिला।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।