शेषनाग से लेकर वासुकि तक... नाग पंचमी पर आखिर क्यों जरूरी है इन 8 नागों की पूजा?
नाग पंचमी पर महादेव के साथ नाग देवता की पूजा का विधान है, जिससे कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन शेषनाग, वासुकि सहित 8 प्रमुख नागों की पूजा की ज ...और पढ़ें
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कौन से हैं 8 नाग? (AI-Generated Image)
HighLights
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा का महत्व।
कालसर्प दोष निवारण हेतु 8 नागों की पूजा।
शेषनाग, वासुकि, पद्म सहित प्रमुख नागों के नाम।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल सावन के महीने में नाग पंचमी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन महादेव के संग नाग देवता की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग देवता की साधना करने से साधक को कालसर्प दोष की समस्या से छुटकारा मिलता है। इस अवसर पर नाग देवता और भगवान शिव को दूध, जल, फूल, और अक्षत अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इससे साधक को जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। नाग पंचमी के दिन 8 नागों की पूजा करना शुभ माना जाता है। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि 8 नाग कौन से हैं, तो आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इनके नाम और महत्व के बारे में।
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नाग पंचमी पर किन नागों की होती है पूजा?
शेषनाग- हिंदू धर्म में शेषनाग को अनंत या आदिषेण भी कहते हैं। शेषनाग को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शेषनाग को सभी नागों का राजा माना जाता है।
वासुकि- ये भगवान शिव के परम भक्त हैं। भगवान शिव अपने गले में वासुकि को धारण करते हैं। समुद्र मंथन के दौरान मंदराचल पर्वत को मथने के लिए रस्सी के रूप वासुकि का ही प्रयोग हुआ था।
पद्म- पद्म नागों का शासन गोमती नदी के पास नेमिश क्षेत्र पर था। इन्हें शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
महापद्म- यह सफेद रंग के भव्य नाग हैं। विष्णुपुराण में सर्पों के विभिन्न कुलों का वर्णन मिलता है।
तक्षक- महाभारत में तक्षक नाग का वर्णन देखने को मिलता है। ऐसा माना जाता है कि यह माता कद्रू के गर्भ से उत्पन्न हुआ था। तक्षक नाग आठ प्रमुख नागों में से एक हैं।
कुलीक- यह नाग ब्राह्मण कुल का माना जाता है। कुलीक नाग का संबंध ब्रह्मा जी से है।
कर्कट- कर्कट को भगवान शिव का गण माना जाता है। इस नाग को सभी नागों में अधिक बुद्धिमान माना जाता है।
काल सर्प दोष निवारण होता है दूर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी के दिन नाग देवता की साधना करने से काल सर्प दोष की समस्या दूर होती है और साधक का मन शांत रहता है। साथ ही काल सर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव कम दूर होते हैं। नाग पंचमी के दिन नाग देवता को दूध अर्पित करना चाहिए। नागों की उत्पत्ति की कथा का वर्णन शिव पुराण में मिलता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।