लक्ष्मी-विष्णु का विवाह हो या जलंधर का अंत; नारद मुनि के वो 7 महान कार्य जो आज भी देते हैं सीख
देवर्षि नारद के मुख से हमेशा 'नारायण-नारायण' की ध्वनि निकलती रहती है और वह सभी युगों में व सब लोकों में प्रवेश कर सकते हैं। ...और पढ़ें

इन कार्यों में रही देवर्षि नारद की अहम भूमिका
HighLights
ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक हैं नारद मुनि
लक्ष्मी-विष्णु विवाह संपन्न कराने में निभाई मुख्य भूमिका
प्रह्लाद, ध्रुव, अम्बरीष को भक्ति मार्ग दिखलाया।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदु शास्त्रों के अनुसार, नारद मुनि ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक हैं। साथ ही वह भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में भी शामिल हैं। माना जाता है कि नारद जी प्रत्येक युग में भगवान की भक्ति और उनकी महिमा का विस्तार करते हुए लोक-कल्याण के लिए सर्वदा सर्वत्र विचरण किया करते रहते हैं। श्रीहरि के महान भक्त नारद जी ने धर्म की स्थापना के लिए कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं, जो इस प्रकार हैं -
देवता के साथ-साथ दावन भी लेते थे परामर्श
देवर्षि नारद द्वारा रचित भक्तिसूत्र, भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक साहित्य में अत्यंत महत्त्वपूर्ण और प्रामाणिक ग्रंथ है। इतना ही नहीं, देवताओं सहित दानवों ने भी उनका सदैव आदर दिया है और समय-समय उनसे परामर्श भी लिया है। देवर्षि नारद की महानता का सबसे बड़ा प्रमाण श्रीमद्भगवद्गीता में मिलता है। इसके दसवें अध्याय (विभूति योग) में योगेश्वर श्रीकृष्ण स्वयं को नारद जी से जोड़ते हुए कहते हैं -
अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारद:।
अर्थात: मैं वृक्षों में पीपल और देवर्षियों में नारद हूं।
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नारद मुनि के कारण ये कहलाए महान भक्त
श्रीमद्भागवत और रामायण जैसे भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य से परिपूर्ण धार्मिक ग्रंथ हमें, देवर्षि नारद जी की कृपा से ही प्राप्त हो सके हैं, क्योंकि उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को 'रामायण' की रचना करने की प्रेरणा दी और वेदव्यास जी का मार्गदर्शन कर उनसे 'श्रीमद्भागवत महापुराण' लिखने के लिए प्रेरित किया।
साथ ही देवर्षि नारद ने ही असुर कुल में जन्मे प्रह्लाद को भक्ति मार्ग में प्रवृत्त किया, जो आगे चलकर महान भक्त कहलाए। इसके साथ ही ध्रुव और राजा अम्बरीष को भी उन्होंने भक्ति का मार्ग दिखलाया।
नारद मुनि के अन्य महत्वपूर्ण कार्य
- भृगु कन्या माता लक्ष्मी का विवाह भगवान विष्णु के साथ संपन्न कराने में नारद जी की मुख्य भूमिका रही।
- उन्होंने महादेव के हाथों दैत्य जलंधर का विनाश सुनिश्चित करवाया और कंस को आकाशवाणी का वास्तविक अर्थ समझाया और धर्म स्थापना की नींव रखी।
- देवर्षि नारद ने इंद्र को उचित परामर्श देकर उर्वशी और पुरुरवा के परिणय सूत्र का मार्ग प्रशस्त किया।
- जब भी पृथ्वी पर भगवान का अवतार (आविर्भाव) होता है, तो नारद जी उनकी लीलाओं के लिए पूर्व-पीठिका तैयार करते हैं।
- उन्होंने देवगुरु बृहस्पति और शुकदेव मुनि जैसे विद्वानों की शंकाओं का समाधान किया और उन्हें परम ज्ञान की ओर अग्रसर किया।
- माना जाता है कि नारद मुनि ब्रह्म-मुहूर्त में सभी जीवों की गति को भी देखते हैं।
साथ ही उन्होंने इन ग्रंथों की भी रचना की -
- नारद पांचरात्र
- नारद के भक्तिसूत्र
- नारद महापुराण
- बृहन्नारदीय उपपुराण-संहिता-(स्मृतिग्रंथ)
- नारद-परिव्राज कोपनिषद
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