इस विशेष शर्त के कारण हुआ मेघनाद का वध, जानें लक्ष्मण जी की जीत की पौराणिक कथा
रामायण का सबसे बड़ा युद्ध लक्ष्मण और मेघनाद के बीच हुआ था। आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं। ...और पढ़ें

Ramayana Mystery: ब्रह्मा जी के इस एक वरदान के कारण लक्ष्मण ने किया मेघनाद का वध। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रावण का पुत्र मेघनाद, जिसे इंद्रजीत भी कहा जाता था, सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक था। उसके पास ऐसी दिव्य और मायावी शक्तियां थीं कि उसने स्वर्ग के राजा इंद्र तक को बंदी बना लिया था। युद्ध के दौरान उसने खुद लक्ष्मण जी को भी एक बार 'नागपाश' में बांध दिया था, लेकिन इतने शक्तिशाली योद्धा का अंत कैसे हुआ? आइए इस आर्टिकल में जानते हैं।

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मेघनाद का वरदान और वह शर्त
रामचरितमानस (लंका कांड) के अनुसार, मेघनाद ने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या कर अजेय होने का वरदान मांगा था। ब्रह्मा जी ने उसे वरदान तो दिया, लेकिन साथ ही, एक बड़ी शर्त भी जोड़ दी। शर्त यह थी कि मेघनाद का वध केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसने लगातार 14 सालों तक निद्रा यानी नींद का त्याग किया हो, जिसने इन सालों में किसी पराई स्त्री का मुख न देखा हो।
मेघनाद को पूरा विश्वास था कि संसार में ऐसा कोई मनुष्य नहीं होगा जो इन शर्तों को पूरा कर सके। इसी घमंड में वह देवताओं और ऋषियों को परेशान करने लगा था।
लक्ष्मण जी ने पूर्ण की सभी शर्तें
भगवान श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने अनजाने में ही इन सभी शर्तों को पूरा कर लिया था, जो उनकी अनन्य भक्ति का प्रमाण था -
- निद्रा का त्याग - जब वनवास शुरू हुआ, तो लक्ष्मण ने प्रभु राम और माता सीता की सुरक्षा के लिए 14 साल तक न सोने का संकल्प लिया था। उन्होंने 'निद्रा देवी' से वरदान मांगा था कि उनकी नींद उनकी पत्नी उर्मिला को दे दी जाए। इसलिए उन्हें नींद को जीतने वाला भी कहा गया है।
- संयम - उन्होंने 14 सालों तक कभी माता सीता के मुख की ओर नहीं देखा। वे केवल उनके चरणों के दर्शन करते थे, ताकि उनके मन में मर्यादा बनी रहे। साथ ही वह सेवा भाव में इतने लीन रहते थे कि उन्होंने 14 सालों तक सही से भोजन तक ग्रहण नहीं किया था। केवल कंद-मूल फल इकट्ठा कर प्रभु राम की आज्ञा से खाते थे।
मेघनाद का ऐसे हुआ अंत
मेघनाद अपनी शक्तियों को अमर बनाने के लिए निकुंभला देवी का यज्ञ कर रहा था। विभीषण ने लक्ष्मण को बताया कि अगर यह यज्ञ पूरा हो गया, तो मेघनाद को मारना मुश्किल हो जाएगा। लक्ष्मण ने उस यज्ञ को बीच में ही भंग कर दिया, जिससे मेघनाद की मायावी शक्तियां कमजोर पड़ गईं। अंत में भीषण युद्ध के बाद लक्ष्मण जी ने मेघनाद का वध कर दिया।
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