नाम जप की महिमा: नरसिंह जयंती पर कैसे करें भगवान विष्णु का ध्यान?
नरसिंह जयंती पर भगवान विष्णु के नामों का जप और ध्यान करने की सही विधि आइए यहां जानते हैं। ...और पढ़ें

नाम जप की महिमा: भगवान विष्णु के नाम। Ai Generated Image
HighLights
नरसिंह जयंती पर जप करना बेहद फलदायी माना गया है
नाम जप एकाग्रता के साथ करना चाहिए
भगवान विष्णु के नाम जप से सभी संकट दूर होते हैं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू शास्त्र कहते हैं कि 'कलियुग केवल नाम अधारा' यानी कि कलियुग में ईश्वर का नाम लेना ही मोक्ष और शांति का सबसे सरल मार्ग है। आज नरसिंह जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इसी दिन भक्त प्रह्लाद ने संकट के समय भगवान के नाम का ध्यान किया था और स्वयं श्री हरि को प्रकट होना पड़ा।
नरसिंह जयंती की रात नाम जप और ध्यान के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। अगर आप इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु के नामों का जप करते हैं, तो मानसिक क्लेश दूर होते हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
नाम जप की महिमा और लाभ
ऐसा माना जाता है कि नाम जप से शरीर के चारों ओर एक सकारात्मक सुरक्षा कवच बन जाता है। नरसिंह जयंती पर किया गया जप आपके अंदर से नकारात्मकता का अंत करता है। यह न केवल शत्रुओं से रक्षा करता है, बल्कि आपके अंदर छिपे क्रोध, लोभ और मोह को भी शांत करता है।
नरसिंह जयंती पर ध्यान की सही विधि
- भगवान विष्णु के नरसिंह स्वरूप का ध्यान करने के लिए जयंती की शाम या रात का समय सबसे फलदायी है।
- स्नानादि के बाद पीले वस्त्र धारण करें।
- कुशा के आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- अपनी आंखें बंद करें और भगवान विष्णु के उस स्वरूप का ध्यान करें, जिसमें वे शांत और अभय मुद्रा में हैं, या भक्त प्रह्लाद को आशीर्वाद दे रहे हैं।
- जप शुरू करने से पहले संकल्प लें फिर नाम जप शुरू करें।
- अंत में क्षमा प्रार्था करकर आरती करें।
करें श्री हरि के इन 108 नामों का जप

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2) ऊँ श्री परमात्मने नम:
3) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम:
4) ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम:
5) ऊँ श्री केशवाय नम:
6) ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम:
7) ऊँ श्री ईश्वराय नम:
8) ऊँ श्री हृषीकेशाय नम:
9) ऊँ श्री पद्मनाभाय नम:
10) ऊँ श्री विश्वकर्मणे नम:
11) ऊँ श्री कृष्णाय नम:
12) ऊँ श्री प्रजापतये नम:
13) ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नम:
14) ऊँ श्री सुरेशाय नम:
15) ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नम:
16) ऊँ श्री सर्वेश्वराय नम:
17) ऊँ श्री अच्युताय नम:
18) ऊँ श्री वासुदेवाय नम:
19) ऊँ श्री पुण्डरीक्षाय नम:
20) ऊँ श्री नर-नारायणा नम:
21) ऊँ श्री जनार्दनाय नम:
22) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:
23) ऊँ श्री चतुर्भुजाय नम:
24) ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नम:
25) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:
26) ऊँ श्री माधवाय नम:
27) ऊँ श्री महाबलाय नम:
28) ऊँ श्री गोविन्दाय नम:
29) ऊँ श्री प्रजापतये नम:
30) ऊँ श्री विश्वातमने नम:
31) ऊँ श्री सहस्त्राक्षाय नम:
32) ऊँ श्री नारायणाय नम:
33) ऊँ श्री सिद्ध संकल्पयाय नम:
34) ऊँ श्री महेन्द्राय नम:
35) ऊँ श्री वामनाय नम:
36) ऊँ श्री अनन्तजिते नम:
37) ऊँ श्री महीधराय नम:
38) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:
39) ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नम:
40) ऊँ श्री दामोदराय नम:
41) ऊँ श्री कमलापतये नम:
42) ऊँ श्री परमेश्वराय नम:
43) ऊँ श्री धनेश्वराय नम:
44) ऊँ श्री मुकुन्दाय नम:
45) ऊँ श्री आनन्दाय नम:
46) ऊँ श्री सत्यधर्माय नम:
47) ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:
48) ऊँ श्री चक्रगदाधराय नम:
49) ऊँ श्री भगवते नम
50) ऊँ श्री शान्तिदाय नम:
51) ऊँ श्री गोपतये नम:
52) ऊँ श्री श्रीपतये नम:
53) ऊँ श्री श्रीहरये नम:
54) ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नम:
55) ऊँ श्री कपिलेश्वराय नम:
56) ऊँ श्री वाराहय नम:
57) ऊँ श्री नरसिंहाय नम:
58) ऊँ श्री रामाय नम:
59) ऊँ श्री हयग्रीवाय नम:
60) ऊँ श्री शोकनाशनाय नम:
61) ऊँ श्री विशुद्धात्मने नम :
62) ऊँ श्री केश्वाय नम:
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64) ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नम:
65) ऊँ श्री श्री यदुश्रेष्ठाय नम:
66) ऊँ श्री लोकनाथाय नम:
67) ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नम:
68) ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नम:
69) ऊँ श्री एकपदे नम:
70) ऊँ श्री सुलोचनाय नम:
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72) ऊँ श्री सप्तवाहनाय नम:
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76) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:
77) ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम
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81) ऊँ श्री प्राणदाय नम:
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92) ऊँ श्री एकातम्ने नम:
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94) ऊँ श्री घनश्यामाय नम:
95) ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:
96) ऊँ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नम:
97) ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नम:
98) ऊँ श्री विराटपुरुषाय नम:
99) ऊँ श्री यशोदानन्दनयाय नम:
100) ऊँ श्री परमधार्मिकाय नम:
101) ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:
102) ऊँ श्री प्रभवे नम:
103) ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताजाय नम:
104) ऊँ श्री गगनसदृश्यमाय नम:
105) ऊँ श्री वामनाय नम:
106) ऊँ श्री हंसाय नम:
107) ऊँ श्री वयासाय नम:
108) ऊँ श्री प्रकटाय नम
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