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मृत्यु के बाद 'सोने की सीढ़ी' चढ़ाने से जुड़ी है गहरी मान्यता, गरुड़ पुराण में बताया गया है इसका विशेष महत्व

Updated: Sat, 15 Aug 2026 07:04 PM (IST)

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद सोने की सीढ़ी चढ़ाने की परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। यह स्वर्ण दान से जुड़ी है और माना जाता है कि इससे मृत आत्मा की परलोक यात्रा आसान होती है और उसे मोक्ष मिलता है।

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद दान का महत्व बताया गया है।  (Picture Credit- AI Generated)

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद दान का महत्व बताया गया है। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले कई संस्कारों और दानों का गरुड़ पुराण में विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इन्हीं में स्वर्ण दान और सोने की सीढ़ी से जुड़ी एक मान्यता भी प्रचलित है। माना जाता है कि मृत्यु के बाद किए जाने वाले कुछ धार्मिक कर्म आत्मा की परलोक यात्रा और मृत व्यक्ति की आत्‍मा की शांति से जुड़े होते हैं।

इन मान्यताओं का उल्लेख गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प (उत्तरार्ध) के अंतर्गत अध्याय 8 (आयुषः शेषे दानवर्णन और मरणकाल में दान) तथा अध्याय 13 और14 (शैयादान और प्रेतलोक मार्ग) में विस्तार से बताया गया है। चलिए इसके बारे में विस्‍तार से जानते हैं।

गरुड़ पुराण में दान का विशेष महत्व

गरुड़ पुराण में मृत्यु, आत्मा की यात्रा और अंतिम संस्कार से जुड़े कई विषयों का वर्णन मिलता है। इसके प्रेतखण्ड में विभिन्न प्रकार के दान और उनके धार्मिक महत्व का उल्लेख किया गया है। इनमें स्वर्ण दान, शय्या दान सहित मृत्‍य व्‍यक्ति अपने जीवनकाल में जिन चीजों का इस्‍तेमाल करता था, उन सभी चीजों के दान को महत्वपूर्ण माना गया है।

सोने की सीढ़ी से जुड़ी मान्यता

सोने की सीढ़ी चढ़ाने की परंपरा को भी स्वर्ण दान से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि स्वर्ण दान करने से मृत व्यक्ति केपाप कम होते हैं और उसकी आत्मा को आगे की यात्रा में सहायता मिलती है। गरुड़ पुराण में सोने की सीढ़ी को उन मृत परिजनों को चढ़ाने की सलाह दी गई है, जिन्‍हें अपने आगे की तीसरी, चौथी पीढ़ी देख ली हो। ऐसा कम ही होता है। कोई व्‍यक्ति अगर सौ वर्ष भी अधिक जी जाए, तो वह अपने इतने आगे की पीढ़ी देखने में सफल हो पाता है।

माना जाता है कि ऐसे लोगों की न तो कोई जिम्‍मेदारी रह जाती है और न ही उन्‍हें कोई मोह माया बचती है। ऐसे में सोने की सीढ़ी अर्थी पर चढ़ाकर उनके मोक्ष का द्वार खोला जाता है। यह सीढ़ी दाह संस्‍कार से पहले पंडित को दान कर दी जाती है। इससे मृत्‍य की आत्‍मा को की परलोक यात्रा आसान हो जाती है।

परलोक की यात्रा से जुड़ा विश्वास

गरुड़ पुराण की मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की एक यात्रा मानी गई है। इसी वजह से मृत व्यक्ति के परिवार की ओर से अलग-अलग धार्मिक कर्म और दान किए जाते हैं।सोने का दान बहुत ही शुभ माना जाता है। मानयता है जिस व्‍यक्ति को सोने की सीढ़ी चढ़ाई जाती है, वो व्‍यक्ति जन्‍म-मरण के चक्र से भी मुक्‍त हो जाता है। इस परंपरा को सबसे नई पीढ़ी के व्‍यक्ति को निभाना होता है।

अत: सोने की सीढ़ी से जुड़ी मान्यता को स्वर्ण दान की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है