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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 19, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Paush Amavasya 2024: पौष अमावस्या पर इस खास समय में करें स्नान, दूर होंगी जीवन की सभी परेशानियां

    Updated: Thu, 19 Dec 2024 04:53 PM (IST)

    पौष अमावस्या हर साल मनाई जाती है। यह तिथि पितृ पूजा को समर्पित है। पंचांग के अनुसार इस साल 30 दिसंबर को (Paush Amavasya 2024 Upay) पौष अमावस्या मनाई ज ...और पढ़ें

    Paush Amavasya 2024: इस समय करें स्नान और दान
    Paush Amavasya 2024: इस समय करें स्नान और दान

    HighLights

    1. अमावस्या तिथि का सनातन धर्म में बड़ा धार्मिक महत्व है।
    2. अमावस्या हर महीने आती है।
    3. अमावस्या पर पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अमावस्या हिंदुओं के बीच बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है। इस दिन को शास्त्रों में बहुत ही शक्तिशाली माना जाता है। यह वह समय है जब चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता है। यह तिथि पितृ पूजा के लिए विशेष होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल पौष अमावस्या 30 दिसंबर, 2024 को मनाई जाएगी। इस दिन गंगा में स्नान करने का भी विधान है। हालांकि स्नान के लिए मुहूर्त का विशेष ध्यान देना चाहिए, तो आइए जानते हैं।

    पौष अमावस्या 2024 डेट और शुभ मुहूर्त (Paush Amavasya 2024 Date and Shubh Muhurat)

    हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल पौष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 30 दिसंबर को सुबह 04 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी है। वहीं, इस तिथि का समापन 31 दिसंबर को सुबह 03 बजकर 56 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए 30 दिसंबर को (Paush Amavasya 2024 Date) पौष अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन दान-पुण्य और गंगा स्नान जरूर करना चाहिए।

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    पौष अमावस्या, 2024 गंगा स्नान समय (Paush Amavasya 2024 Snan-Daan Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त 05 बजकर 16 मिनट से 06 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 07 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।

    इसके साथ ही अमृत काल शाम 05 बजकर 24 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। इस दौरान आप स्नान और दान कर सकते हैं।

    गंगा पूजन मंत्र 

    • ॐ नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नमः।।
    • ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा।।
    • गंगागंगेति योब्रूयाद् योजनानां शतैरपि। मच्यते सर्व पापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति।।

    पितृ पूजन मंत्र

    • ॐ पितृ देवतायै नमः।।
    • ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।।
    • ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।।

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