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    Paush Month 2025: एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक, यहां पढ़ें पौष माह के व्रत-त्योहारों की लिस्ट

    Updated: Tue, 02 Dec 2025 10:56 AM (IST)

    पौष माह, हिंदू कैलेंडर का 10वां महीना है, जो 5 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक चलने वाला है। इस माह में सूर्य देव की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। ...और पढ़ें

    Paush Month vrat tyohar 2025

    Paush Month vrat tyohar 2025

    HighLights

    1. 5 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहा है पौष माह।

    2. इस माह में है सूर्य देव की आराधना का महत्व।

    3. पौष माह में मनाए जाएंगे कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मार्गशीर्ष माह की समाप्ति के बाद पौष का महीना आरंभ होता है, जिसे पूष माह के नाम से भी जाना जाता है। इस माह में गुरु गोविंद सिंह जयंती (Guru Gobind Singh Jayanti) और पौष पुत्रदा एकादशी जैसे कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। 

    धार्मिक दृष्टि से इस माह का विशेष महत्व है, और यह भी माना जाता है कि इस माह में सूर्य देव की आराधना करने से जातक को धन व ऐश्वर्य की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि पौष मास (Paush Month 2025) में कौन-कौन से महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार पड़ रहे हैं।

    पौष माह के व्रत-त्योहार

    • शुक्रवार 5 दिसंबर 2025 - रोहिणी व्रत (जब सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र प्रबल होता है, तब रोहिणी व्रत किया जाता है, जो जैन धर्म के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है)
    • रविवार 7 दिसंबर 2025 - अखुरथ संकष्टी चतुर्थी
    • गुरुवार 11 दिसंबर 2025 - कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
    • सोमवार 15 दिसंबर 2025 - सफला एकादशी

    Ekadashi 2024 I

    • मंगलवार 16 दिसंबर 2025 - धनु संक्रांति, खरमास शुरू
    • बुधवार 17 दिसंबर 2025 - बुध प्रदोष व्रत
    • गुरुवार 18 दिसंबर 2025 - मासिक शिवरात्रि
    • शुक्रवार 19 दिसंबर 2025 - पौष अमावस्या
    • बुधवार 24 दिसंबर 2025 - विघ्नेश्वर चतुर्थी
    • शनिवार 27 दिसंबर 2025 - गुरु गोविंद सिंह जयंती

    Guru Gobind Singh Jayanti I

    खबरें और भी

    • मंगलवार 30 दिसंबर 2025 - पौष पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi 2025)
    • गुरवार 1 जनवरी 2026 - रोहिणी व्रत, प्रदोष व्रत, नव वर्ष
    • शनिवार 3 जनवरी 2026 - पौष पूर्णिमा (Paush Purnima), माघ स्नान प्रारंभ (हिंदू धर्म में माघ स्नान को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पापों का नाश, आध्यात्मिक शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति होती है)

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