पितृ पक्ष में काले तिल का दान क्यों होता है अनिवार्य? 1 भूल और पूर्वज रह जाएंगे भूखे!
पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद करते हुए श्राद्ध, तर्पण और दान किया जाता है, जिसमें काले तिल का उपयोग ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में काले तिल का दान क्यों है जरूरी (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
काले तिल का उपयोग पितृ पक्ष में अनिवार्य माना जाता है।
भगवान विष्णु के पसीने से हुई है काले तिल की उत्पत्ति।
काले तिल दान से पितृ दोष और शनि दोष शांत होते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पितृ पक्ष को समय माना जाता है जिसमें लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी याद में तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्म करते हैं। इस समय को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करने का समय माना जाता है।
इस दौरान लोग कई धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है, जिनमें से एक है काले तिल का दान करना। इस दौरान काले तिल का उपयोग तर्पण में तो किया ही जाता है और इसके दान के बिना पूर्वजों को श्राद्ध स्वीकार नहीं होता है।
मान्यता है कि तर्पण में काले तिल डालने और जरूरतमंद को दान में काले तिल देने से पूर्वजों को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी श्री चंद्रेश शर्मा से जानें पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और दान के समय काले तिल का उपयोग अनिवार्य क्यों माना जाता है?
काले तिल का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
काले तिल को श्राद्ध के लिए सबसे जरूरी सामग्री माना जाता है और पितृ पक्ष की पूरी अवधि में काले तिल को हर कर्म में प्रयोग किया जाता है। मुख्य रूप से आप इस दौरान जिस चीज का भी दान क्यों न करें उसके साथ काले तिल दान में जरूर देने चाहिए।
भगवान विष्णु से उत्पत्ति
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, काले तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई थी, जिसके कारण इन्हें अत्यंत पवित्र माना गया है और किसी भी पूजन के साथ पितृ पक्ष के कर्मों में भी इसका उपयोग शुभ माना जाता है।
ग्रहों की शांति के लिए काले तिल का दान
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, काले तिल का संबंध शनि और राहु-केतु जैसे छाया ग्रहों से होता है। श्राद्ध के दौरान काले तिल का दान करने से कुंडली में मौजूद पितृ दोष और शनि दोष शांत होते हैं।
ऊर्जा का शोधन
काला तिल जीवन की किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने और वातावरण को शुद्ध करने के लिए उपयुक्त सामग्री है। इसलिए पितृ पक्ष में इसका उपयोग करना जरूरी माना जाता है।
पितरों को तृप्ति मिलती है
यह माना जाता है कि बिना तिल के अर्पण किया गया जल या भोजन दुष्ट आत्माएं ग्रहण कर लेती हैं, जबकि काले तिल अर्पित करने से तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है और उनकी आत्मा को तृप्ति तथा मोक्ष मिलता है। यही नहीं इस दौरान तिल का दान सीधे पूर्वजों को जाता है।
अगर आप भी पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध करते समय दान में काले तिल नहीं देते हैं, तो आपकी इस एक गलती से पूर्वज नाराज हो सकते हैं। यही नहीं इसके बिना कोई भी दान पूर्वजों को स्वीकार्य नहीं होगा।
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