पितृ पक्ष में तर्पण करते समय भूलकर भी न करें दिशा की अनदेखी, गरुड़ पुराण में लिखा है यह खास नियम
गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष में तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे पितृ लोक की दिशा माना जाता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार दक्षिण मुखी तर्पण का महत्व (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
तर्पण हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करें।
गरुड़ पुराण में दक्षिण दिशा को पितृ लोक माना गया है।
सही विधि और दिशा से तर्पण पूर्वजों का आशीर्वाद दिलाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है और इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा को शांति दिलाने के लिए तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्म करते हैं। जिस दिन पूर्वजों का श्राद्ध होता है उस दिन कई नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
घर पर श्राद्ध पूजा विधि जल्दी स्नान से शुरू होती है और इस दिन लोग साफ, सफेद या हल्के पीले कपड़े पहनते हैं और एक निश्चित दिशा की तरफ मुख करके ही श्राद्ध करना चाहिए।
लोग अक्सर पूर्वजों के श्राद्ध के नियमों का पालन करते हुए सभी कर्म करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं, लेकिन यदि तर्पण गलत दिशा में खड़े होकर किया जाता है, तो वह स्वीकार्य नहीं माना जाता है। आइए आपको बताते हैं कि पितृ पक्ष में तर्पण या श्राद्ध से जुड़ा कोई भी कर्म करते समय मुंह किस दिशा में होना चाहिए?
पितृ पक्ष में तर्पण करने की सही दिशा
गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष में तर्पण करने की एक निश्चित दिशा होती है और उसी दिशा को पूर्वजों की दिशा माना जाता है। आपको हमेशा तर्पण दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके ही करना चाहिए। इस दिशा को पितृ लोक की दिशा माना जाता है और इसी दिशा में हमारे पूर्वज निवास करते हैं। इस दिशा में मुख करके लिया गया तर्पण पूर्वज तुरंत स्वीकार कर लेते हैं।
हिंदू धर्म में दक्षिण दिशा को यम और पूर्वजों की दिशा बताया गया है, इसी वजह से कोई भी श्राद्ध से जुड़ा हुआ काम इसी दिशा की तरफ मुख करके करने की सलाह दी जाती है।
जब भी जातक अपने पूर्वजों के लिए तर्पण कर्म कर रहा हो, तो उसे दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके, जनेऊ धारण करने के बाद हाथ में जल लेकर तर्पण करना चाहिए। यही नहीं पिंडदान करते समय भी मुख दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए।
पूर्वजों के लिए तर्पण करने की सही विधि क्या है?
जो भी जातक अपने पितरों के निमित्त तर्पण कर्म करते हैं उन्हें कुछ विशेष नियमों का पालन करते हुए सही विधि से तर्पण करना चाहिए।
- पूर्वजों की तिथि वाले दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो सफेद वस्त्र ही पहनें।
- तर्पण और श्राद्ध का कर्म हमेशा अभिजीत मुहूर्त में करना शुभ माना जाता है।
- तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें और आंखें बंद करके पूर्वजों का ध्यान करें।
- तर्पण करने से पहले जनेऊ अवश्य धारण करें और इसे दाहिने कंधे से लेकर बाईं तरफ ले जाएं।
- तर्पण के लिए दोनों हथेलियों में जल लेकर अंगूठे और तर्जनी के बीच के हिस्से से जल अर्पित करें और अपने पूर्वजों का ध्यान करें।
- हर एक पूर्वज के लिए आप तीन बार जल अर्पित करें और इस तर्पण कर्म को समाप्त करते समय हाथ जोड़कर पूर्वजों से क्षमा मांगें।
तर्पण के समय कौन सा मंत्र पढ़ें
जब आप पूर्वजों के लिए तर्पण कर्म कर रहे हैं, तो आपको एक मंत्र का जाप करना चाहिए-
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
ॐ पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
ॐ प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः॥
यदि आप सही दिशा की तरफ मुख करके तर्पण करते हैं और पूर्वजों के लिए सही विधि से श्राद्ध करते हैं, तो उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।
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