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    Pradosh Vrat 2025 November: सोम प्रदोष व्रत पर करें ये विशेष आरती, मिलेगा व्रत के बराबर शुभ फल

    Updated: Mon, 17 Nov 2025 06:20 AM (IST)

    प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जो सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है। 17 नवंबर 2025 को सोमवार के दिन (Pradosh Vrat 2025 November) पड़ने से इसका महत् ...और पढ़ें

    Pradosh Vrat 2025 November: सोम प्रदोष व्रत की आरती।

    Pradosh Vrat 2025 November: सोम प्रदोष व्रत की आरती।

    HighLights

    1. सोम प्रदोष व्रत आज रखा जा रहा है।

    2. यह शिव जी को समर्पित है।

    3. इस दिन व्रत रखने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जिसका पालन करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह शुभ तिथि इस बार सोमवार यानी आज 17 नवंबर 2025 को पड़ रही है। सोमवार को पड़ने की वजह से इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में इस दिन (Pradosh Vrat 2025 November) सुबह और शाम के समय शिव जी की विधिवत पूजा करें। उन्हें बिल्व पत्र, सफेद फूल, मिठाई अर्पित करें। अंत में आरती करें, जो इस प्रकार हैं।

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    ।।शिव जी की आरती।। (Lord Shiv Aarti)

    जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

    ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥

    एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

    हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

    दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

    त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥

    अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

    चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥

    श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

    सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥

    कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

    जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

    प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

    काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

    नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

    त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।

    कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥

    ।।माता पार्वती की आरती।। (Mata Parvati Ki Aarti)

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता

    ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता

    जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा

    देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता

    हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता

    सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता

    नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    देवन अरज करत हम चित को लाता

    गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।

    जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

    श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता

    सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।

    जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

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