हर मुराद होगी पूरी! प्रदोष व्रत पर इस विधि से करें शिवलिंग का अभिषेक, शिव जी भर देंगे झोली
प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत मंगलकारी माना जाता है। यह भगवान शिव को समर्पित है। ...और पढ़ें

Pradosh Vrat 2026: शिवलिंग पूजा में न करें ये गलतियां। (Ai Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शक्तिशाली दिन माना जाता है। प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत जीवन से दरिद्रता, रोग और संकटों का नाश करता है। वहीं, इस दिन प्रदोष काल में किया गया शिवलिंग का अभिषेक भी बहुत मंगलकारी माना गया है। अगर आप भी अपनी किसी इच्छा को पूरा करना चाहते हैं, तो इस प्रदोष व्रत पर शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करें। आइए उससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।

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प्रदोष व्रत 2026 तिथि और समय (Pradosh Vrat 2026 Date And Time)
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल को रात 12 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल का समय शाम को 06 बजकर 47 मिनट से 09 बजे तक है।
कैसे करें शिवलिंग का अभिषेक?
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और शाम के समय शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग की पूजा करें।
- सबसे पहले शिवलिंग को शुद्ध जल और गंगाजल से स्नान कराएं।
- अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तो कच्चे दूध और शहद से अभिषेक करें।
- अगर शत्रुओं से परेशान हैं या कर्ज बढ़ा हुआ है, तो गन्ने के रस से अभिषेक करें।
- अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं।
- भगवान शिव को भस्म, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें।
- शिव जी को बिल्व पत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करे।
- साथ ही बेलपत्र कटा-फटा नहीं होना चाहिए।
- प्रदोष काल में शिवलिंग के पास गाय के घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद 'शिव चालीसा' या 'रुद्राष्टकम' का पाठ करें।
- अंत में भक्ति भाव के साथ आरती करें।
न करें ये गलतियां
- केतकी के फूल - भगवान शिव ने केतकी के फूल को श्राप दिया था। इसलिए शिवलिंग पर केतकी का फूल भी नहीं चढ़ाना चाहिए।
- टूटे हुए चावल - पूजा में हमेशा साबुत चावल का ही इस्तेमाल करें। टूटे हुए चावल अपूर्णता का प्रतीक होते हैं, इसलिए उन्हें भगवान को नहीं चढ़ाने चाहिए।
पूजा मंत्र
1. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
2. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
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