दिन के अनुसार बदल जाता है प्रदोष व्रत का , जानिए किस दिन व्रत रखने से दूर होता है कौन सा संकट दूर
आइए यहां सप्ताह के दिनों के अनुसार प्रदोष व्रत का अलग-अलग महत्व पढ़ते हैं। ...और पढ़ें

Pradosh Vrat Benefits: जानिए दिन के अनुसार प्रदोष व्रत का महत्व।
HighLights
दिनों के अनुसार प्रदोष व्रत का धार्मिक फल अलग होता है
यह भगवान शिव को समर्पित है
सूर्यास्त के समय महादेव की पूजा करने से ही व्रत का पूरा फल मिलता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष व्रत को बहुत शुभ माना गया है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस दिन पूर्ण भक्ति से महादेव और माता पार्वती की पूजा करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं,
लेकिन क्या आप जानते हैं कि सप्ताह के सात दिनों के आधार पर प्रदोष व्रत का महत्व और उसका फल पूरी तरह बदल जाता है? तो आइए जानते हैं किस दिन व्रत रखने से क्या लाभ होता है?
प्रदोष व्रत का महत्व और चमत्कारी फायदा
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- सोम प्रदोष व्रत - सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष कहा जाता है। यह व्रत मानसिक शांति और अच्छी सेहत के लिए रखा जाता है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, उन्हें यह व्रत जरूर करना चाहिए। इससे मनचाहा वरदान मिलता है।
- भौम प्रदोष व्रत - मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहते हैं। यह व्रत विशेष रूप से कर्ज से मुक्ति पाने और आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए किया जाता है। इससे मंगल दोष भी शांत होता है।
- बुध प्रदोष व्रत - बुधवार को पड़ने वाले इस व्रत से ज्ञान, बुद्धि और करियर में उन्नति मिलती है। अगर आपके कामों में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, तो बुध प्रदोष का व्रत रखना बेहद फलदायी होता है।
- गुरु प्रदोष व्रत - गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत से शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही, वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
- शुक्र प्रदोष व्रत - शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से जीवन में सुख, सौभाग्य, धन-धान्य और आकर्षण की वृद्धि होती है।
- शनि प्रदोष व्रत - शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत संतान प्राप्ति की कामना के लिए सबसे शुभ माना गया है। इसके अलावा, नौकरी में तरक्की और शनि के प्रकोप से बचने के लिए भी यह व्रत अचूक है।
- रवि प्रदोष व्रत - रविवार को पड़ने वाले इस व्रत से लंबी उम्र, अच्छी सेहत और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
पूजा का नियम
प्रदोष व्रत का पूरा फल तभी मिलता है, जब पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के ठीक बाद के समय में की जाए। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत शुभ होता है। ऐसे में इस दौरान भोलेनाथ की विधिवत पूजा करें और अंत में आरती करें।
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