रूप और रुपये का अहंकार, आपसे छीन सकता है ये 5 चीजें
जब व्यक्ति अपने सौंदर्य और पैसों पर इतराने लगता है, तो धीरे-धीरे उसके जीवन से 5 जरूरी चीजें दूर होने लगती हैं। ...और पढ़ें

रूपवान होना भी व्यक्ति के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। घघमंड एक भावना होने के साथ-साथ बहुत गंभीर बीमारी है। इस बीमारी के कारण जीवन में हम बहुत पीछे छूट जाते हैं और हमारा सबकुछ हमसे छिन जाता है। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि महाभारत की विदुर नीति के उद्योग पर्व के अंतर्गत प्रजागर पर्व के 33वें से 40वें अध्यायों में वर्णित है कि यदि हमारे अंदर अहंकार है, तो हम जीवन में काफी कुछ खो रहे हैं। खासतौर पर रूप और रुपये का घमंड हमसे हमारी यह पांच कीमती चीजें छीन लेता है। चलिए हम आपको उन चीजों के बारे में बताते हैं।
छिन जाता है सम्मान
यदि आपको रूप और रुपये का घमंड है, तो सबसे पहले छिनने वाली चीजों में आपका सम्मान आता है। लोग आपका सम्मान करना बंद कर देंगे। क्योंकि घमंड में व्यक्ति अपने सामने वालों को कुछ भी नहीं समझता, वो उनका तिरस्कार करता है और उन्हें बात-बात पर नीचा दिखाता है। ऐसे में वो खुद का आदर उनकी नजरों में खो देता है।
टूट जाते हैं सच्चे रिश्ते
पैसों का घमंड अक्सर सच्चे रिश्तों को तोड़ देता है। पैसा होता है तो व्यक्ति खुद को ऊंचा और दूसरों को नीची निगाहों से देखता है। सच्चे रिश्ते कांच की तरह होते हैं, यदि घमंड का पत्थर उन पर लगता है, तो वह टूटकर बिखर जाते हैं।
खत्म हो जाती है मानसिक शांति
बहुत रूपवान होना भी व्यक्ति के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे लोगों को बहुत जल्दी नजर लग जाती है। वहीं बहुत पैसा होने पर हमेशा व्यक्ति को उसके खोने या चोरी होने का भय लगा रहता है। इसे मानसिक शांति भंग होती है।
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खत्म हो जाती है कुछ नया सीखने की क्षमता
जब इंसान को अपने रूप और पैसे पर घमंड हो जाता है, तो वो खुद को सबसे बुद्धिमान समझने लगता है। उसे लगता है उसे सब आता है। इस वजह से वो नई चीजें सीखना बंद कर देता है और तरक्की के मौके भी गवां देता है।
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न होते हैं शुभचिंतक, न होते हैं आलोचक
जिन्हें रूप और रुपये का घमंड हो जाता है, उन्हें लगता है कि उन्होंने सब कुछ पा लिया है। ऐसे में न तो उनके कोई शुभचिंतक बचते हैं और न ही कोई आलोचक।
अत: विदुर नीति में साफ-साफ इस बात का उल्लेख मिलता है कि व्यक्ति को अहंकार का दामन छोड़ विनम्रता को महत्व देना चाहिए।
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