कुंडली के किस भाव में राहु देता है सबसे ज्यादा समस्या? जानिए शरीर और जीवन पर इसका असर
वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह कहा जाता है। कुंडली में राहु अलग-अलग भाव में अलग परिणाम देता है। जानिए कुंडली में राहु का प्रभाव। ...और पढ़ें

कुंडली में राहु का प्रभाव (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में राहु को क्रूर ग्रहों में शामिल है, जिसे भौतिक ग्रह नहीं, बल्कि 'छाया ग्रह' माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक, राहु जातक के जीवन में माया, अचानक परिवर्तन, महत्वाकांक्षा, मानसिक दबाव, विदेशी संबंध, तकनीक और राजनीति जैसी चीजों का असल कारण माना जाता है।
यही कारण है कि, कुंडली में राहु जिस भी भाव में विराजमान रहता है, उस भाव से जुड़े क्षेत्रों में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
राहु का प्रभाव अलग-अलग भावों में
राहु कुंडली में जिस भी भाव में बैठता है, उस अंग में बीमारी जरूर देता है, लेकिन ज्योतिष के जानकार इसे पूरी तरह सच नहीं मानते हैं।
बृहत पाराशर होरा शास्त्र और अन्य वैदिक ग्रंथों के हिसाब से किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी कुंडली, ग्रह दशा, राशि और अन्य चीजों का विश्लेषण करना बेहद जरूरी है।
राहु का पहले और दूसरे भाव प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, प्रथम भाव में राहु के विराजमान होने से व्यक्ति को मानसिक तनाव, अत्यधिक सोचना, पहचान को लेकर भ्रम और आत्मविश्वास में कमी महसूस कर सकता है।
जबकि दूसरे भाव में राहु कठोर वाणी, पारिवारिक तनाव और गले से जुड़े समस्याओं का संकेत देता है।


(AI-Generated Image)
राहु तीसरे भाव में संबंधों में तनाव
कुंडली के तीसरे भाव में राहु के होने से भाई-बहन के संबंधों में तनाव के साथ कंधों में दर्द, संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।
चौथे भाव में राहु मानसिक अशांति, घर-परिवार में अस्थिरता, तनाव और माता-पिता से मतभेद का कारण माना जाता है। जबकि पांचवें भाव में यह पाचन से जुड़ी समस्या, प्यार में कठोरता और संतान पक्ष की समस्या दे सकता है।
छठे भाव में कैसा प्रभाव?
छठे भाव का राहु दुश्मन, कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामले और पेट के निचले हिस्से में दर्द से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। सातवें भाव में राहु वैवाहिक जीवन में गलतफहमी और रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।
जबकि आठवें भाव का राहु अचानक घटनाएं, गुप्त रोड़ी समस्या और लंबे समय तक आर्थिक चुनौती का कारण बन सकता है।
राहु केवल नेगेटिव नहीं है
वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, दसवें भाव में राहु अचानक बदलाव, पॉलिटिक्स और मीडिया में सफलता के साथ विवाद भी दे सकता है। ग्यारहवें भाव में राहु लालच, गलत लोगों की संगति और अत्यधिक खर्च बढ़ा सकता है। जबकि बारहवें भाव का राहु विदेश यात्रा के साथ नींद से जुड़ी समस्या और मानसिक बेचैनी का कारण बन सकता है।
ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि, राहु हमेशा नकारात्म परिणाम ही नहीं देता, अगर राहु शुभ ग्रहों के प्रभाव में हो, तो व्यक्ति को सोशल मीडिया, फिल्म, पॉलिटिक्स और विदेशी मामलों में बड़ी सफलता दिला सकता है। इसलिए केवल एक भाव को देखकर डर की स्थिति में आ जाना कि, अब तो सब कुछ बुरा होगा पूरी तरह गलत है।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें- नजरबट्टू, जूता, सूर्य तांबा या घोड़े की नाल, घर की सुरक्षा के लिए कौन-सा तरीका है सबसे असरदार?
यह भी पढ़ें- मैनिफेस्टेशन क्यों नहीं करती काम? जानें आकर्षण के नियम के रहस्य
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।