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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 15, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rahu-Ketu Ke Upay: कुंडली में राहु-केतु की खराब स्थिति से राहत के लिए करें ये काम

Published: Thu, 15 May 2025 10:00 PM (IST)

ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार राहु और केतु छाया ग्रह माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि कुंडली ...और पढ़ें

Rahu-Ketu Ke Upay: राहु-केतु के दुष्प्रभाव से राहत के उपाय।
Rahu-Ketu Ke Upay: राहु-केतु के दुष्प्रभाव से राहत के उपाय।

HighLights

  1. छाया ग्रह माने जाते हैं राहु और केतु ग्रह।
  2. जीवन पर भी पड़ता है इनका गहरा असर।
  3. कुंडली में स्थिति होने से होता है नुकसान।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में माना गया है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु की स्थिति खराब है, तो ऐसे में उसे नकारात्मक परिणाम झेलने पड़ते हैं। इसके कारण विकास की गति धीमी हो जाती है। साथ ही प्रेम जीवन में भी समस्याएं आने लगती हैं और धन संचय में गिरावट आती है।

वहीं अगर कुंडली केतु की स्थिति खराब होती है, तब भी व्यक्ति को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इससे व्यक्ति गलत आदतो में पड़ जाता है। साथ ही कार्यों में भी बाधा आने लगती है। ऐसे में जातक राहु ग्रह कवच और केतु ग्रह कवच का पाठ कर सकते हैं। जिससे आपको अपनी स्थिति में लाभ देखने को मिल सकता है।

॥राहु ग्रह कवच॥

''अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमंत्रस्य चंद्रमा ऋषिः ।

अनुष्टुप छन्दः । रां बीजं । नमः शक्तिः ।

स्वाहा कीलकम् । राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥

प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिन् ॥

सैन्हिकेयं करालास्यं लोकानाम भयप्रदम् ॥

निलांबरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः ।

चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरीरवान् ॥

नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम ।

जिव्हां मे सिंहिकासूनुः कंठं मे कठिनांघ्रीकः ॥

भुजङ्गेशो भुजौ पातु निलमाल्याम्बरः करौ ।

पातु वक्षःस्थलं मंत्री पातु कुक्षिं विधुंतुदः ॥

कटिं मे विकटः पातु ऊरु मे सुरपूजितः ।

स्वर्भानुर्जानुनी पातु जंघे मे पातु जाड्यहा ॥

गुल्फ़ौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः ।

सर्वाणि अंगानि मे पातु निलश्चंदनभूषण: ॥

राहोरिदं कवचमृद्धिदवस्तुदं यो ।

भक्ता पठत्यनुदिनं नियतः शुचिः सन् ।

प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायु

रारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात्'' ॥

राहु के मंत्र -

  • || ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः ||
  • || ॐ नागध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात् ||
  • || ॐ अर्धकायं महावीर्य चन्द्रादित्यविमर्दनम, सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम ||

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॥ केतु ग्रह कवच ॥

''अस्य श्रीकेतुकवचस्तोत्रमंत्रस्य त्र्यंबक ऋषिः ।

अनुष्टप् छन्दः । केतुर्देवता । कं बीजं । नमः शक्तिः ।

केतुरिति कीलकम् I केतुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥

केतु करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम् ।

प्रणमामि सदा केतुं ध्वजाकारं ग्रहेश्वरम् ॥

चित्रवर्णः शिरः पातु भालं धूम्रसमद्युतिः ।

पातु नेत्रे पिंगलाक्षः श्रुती मे रक्तलोचनः ॥

घ्राणं पातु सुवर्णाभश्चिबुकं सिंहिकासुतः ।

पातु कंठं च मे केतुः स्कंधौ पातु ग्रहाधिपः ॥

हस्तौ पातु श्रेष्ठः कुक्षिं पातु महाग्रहः ।

सिंहासनः कटिं पातु मध्यं पातु महासुरः ॥

ऊरुं पातु महाशीर्षो जानुनी मेSतिकोपनः ।

पातु पादौ च मे क्रूरः सर्वाङ्गं नरपिंगलः ॥

य इदं कवचं दिव्यं सर्वरोगविनाशनम् ।

सर्वशत्रुविनाशं च धारणाद्विजयि भवेत्'' ॥

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केतु के मंत्र 

  • ॐ श्रम श्रीं सरं सह केतवे नमः ||
  • ॐ केम केतवे नमः ||
  • ॐ हम केतवे नमः ||

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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