भाई-बहन का त्योहार कैसे बना रक्षाबंधन? जानिए जब युद्ध में हारते इंद्रदेव की कलाई पर सजा था पहला रक्षासूत्र
रक्षाबंधन का पर्व सावन पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसमें बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। इसकी शुरुआत ...और पढ़ें
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रक्षाबंधन की कथा (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2026) के पर्व को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व धर्म, वचन और पवित्रता का उत्सव है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन का पर्व आज यानी 28 अगस्त को मनाया जा रहा है।
इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और तिलक करती है। साथ ही भाई उपहार देता है और हर प्रकार के संकट से रक्षा करने का वचन देता है। क्या आप जानते हैं कि रक्षा बंधन के पर्व को मनाने की शुरुआत कैसे हुई थी? अगर नहीं पता, तो आइए हम आपको बताते हैं इसके पीछे की कथा के बारे में।
इंद्र और शचि की कथा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रक्षाबंधन के पर्व को मनाने की शुरुआत को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सबसे पहले राखी सतयुग में देवी शचि ने अपने पति इंद्र को बांधी थी।
देवासुर संग्राम और देवताओं की हार
भविष्य पुराण के उत्तर पर्व (अध्याय 137) में देवी शचि (इंद्राणी) और देवराज इंद्र से जुड़ी रक्षासूत्र (राखी) की एक बेहद रोचक कथा का वर्णन किया गया है। इस कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और असुरों के बीच कई वर्षों तक युद्ध चला। इस युद्ध के दौरान असुरों का आतंक अधिक बढ़ गया और देवता हारने लगे। अपने पति देवराज इंद्र को लगातार कमजोर पड़ता देख, इंद्राणी बेहद चिंतित और परेशान हो गईं।
युद्ध में हार से बचने के लिए इंद्राणी ने देवगुरु बृहस्पति से उपाय पूछा, तो उन्होंने इंद्राणी को सावन माह की पूर्णिमा तिथि पर रक्षा विधान करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर पत्नी अपने पति की कलाई पर रक्षासूत्र बांधे, तो वह जीवन में सदैव हर संकट से सुरक्षित रहेगा।
इसके बाद इंद्राणी ने देवगुरु बृहस्पति के वचन का पालन किया और सावन पूर्णिमा के दिन देवराज इंद्र की कलाई पर एक धागा बांध दिया। इस धागे के प्रभाव की वजह से इंद्रदेव को नई शक्ति प्राप्त हुई, जिसकी वजह से देवराज इंद्र ने असुरों को युद्ध में हरा दिया और अपना खोया हुआ राज्य वापस पा लिया। इसलिए सावन पूर्णिमा के दिन हर साल रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी कथा को रक्षासूत्र बांधने की सबसे प्राचीन परंपरा माना जाता है। वर्तमान में रक्षाबंधन का महापर्व मुख्य रूप से भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार माना जाता है।
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