सिर्फ शव यात्रा के दौरान ही क्यों बोला जाता है 'राम नाम सत्य है'? जानें इसके पीछे का गहरा रहस्य
हिंदू शव यात्राओं में 'राम नाम सत्य है' बोला जाता है, जो केवल एक वाक्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत गहरा अर्थ भी छिपा हुआ है। यह वाक्य, व्यक्ति की ...और पढ़ें
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शव यात्रा में क्यों बोलते हैं 'राम नाम सत्य है' (AI Generated Image)
HighLights
जीवन की नश्वरता का प्रतीक है 'राम नाम सत्य है'
यह जप आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करता है
शास्त्रों में भी बताई गई है राम नाम की महिमा
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मृत्यु एक ऐसा सच है जिसे टाला नहीं जा सकता। जिसका भी जन्म हुआ है, उसे एक दिन मृत्यु का भी सामना करना ही पड़ता है। हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा यानी शव यात्रा के दौरान सभी लोग 'राम नाम सत्य है' बोलते हुए चलते हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि यह क्यों बोला जाता है। आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।
इसलिए बोला जाता है यह वाक्य
शव यात्रा में 'राम नाम सत्य है' बोला जाता है, जिसे जीवन की नश्वरता और ईश्वर की सर्वोच्चता का प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसका अर्थ है कि इस दुनिया में केवल परमात्मा का नाम ही ऐसा है, जो सत्य है और मृत्यु के बाद आत्मा को मुक्ति दिलाने का मार्ग भी है।
बाकी सब इस नश्वर संसार में मोह-माया और क्षणभंगुर है। इस जप से मृतक के लिए शांति और मोक्ष की कामना की जाती है। साथ ही यह शव यात्रा में शामिल हुए लोगों को यह याद भी दिलाता रहता है कि सब कुछ अस्थायी है।
इससे समझिए राम नाम की महिमा
1. 'अहन्यहनि भूतानि गच्छंति यमममन्दिरम्।
शेषा विभूतिमिच्छंति किमाश्चर्य मत: परम्।।'
यह श्लोक महाभारत से लिया गया है और यक्ष-युधिष्ठिर संवाद से जुड़ा है। इस श्लोक का अर्थ है कि हर दिन कोई-न-कोई प्राणी मृत्यु (यमलोक) को प्राप्त होता है, फिर भी बचे हुए लोग यानी जो जीवित हैं, धन-संपत्ति और अमरत्व की इच्छा रखते हैं, इससे बड़ा आश्चर्य क्या हो सकता है?
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यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि इस पृथ्वी पर सभी कुछ क्षणभंगुर है और केवल राम नाम यानी ईश्वर ही सत्य है। ऐसे में जब हम शवयात्रा में 'राम नाम सत्य है' कहते हैं, तो यह हमें यह याद दिलाता रहता है कि केवल ईश्वर ही शाश्वत है और बाकी सब यहीं छूट जाएगा।

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2. शिवे शिवे न संचारों भवत प्रेतस्य कस्यचित।
अतसिद्दाहपर्यंतम राम नाम जपो वरम।।
रुद्रयामल तन्त्र के इस श्लोक में यह बताया गया है कि मृत व्यक्ति के शव में किसी प्रेत आत्मा का प्रवेश न हो, इसलिए अग्नि देने तक ‘राम’ नाम का उच्चारण करना चाहिए। क्योंकि यह मंत्र प्रेत-बाधाओं को दूर भगाता है और आत्मा को शांति देता है, जिससे 'राम नाम सत्य है' की परंपरा का भी आधार मिलता है।
3. श्रीशब्धमाद्य जयशब्दमध्यंजयद्वेयेनापि पुनःप्रयुक्तम्।
अनेनैव च मन्त्रेण जपः कार्यः सुमेधसा।
आनंद रामायण का यह श्लोक 'श्रीराम जय राम जय जय राम' मंत्र की महिमा बताता है। इस श्लोक में कहा गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति को इसी मंत्र का जप करना चाहिए, क्योंकि यह अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी है, जो सभी कामनाओं की पूर्ति करता है और मोक्ष प्रदान करता है।
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