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    वैशाख अमावस्या पर करें तुलसी चालीसा का पाठ, जानिए इसके लाभ और महत्व

    Updated: Fri, 10 Apr 2026 05:39 PM (IST)

    वैशाख अमावस्या का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है। इस दिन तुलसी की पूजा करने से घर से दरिद्रता दूर होती है। ...और पढ़ें

    Vaishakh Amavasya 2026: तुलसी चालीसा का पाठ। Ai Generated Image

    Vaishakh Amavasya 2026: तुलसी चालीसा का पाठ। Ai Generated Image

    HighLights

    1. अमावस्या पर तुलसी चालीसा के पाठ से पितृ खुश होते हैं

    2. अमावस्या हर महीने आती है

    3. इस दिन पितरों का तर्पण करने का विधान है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैशाख महीने की अमावस्या तिथि का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। यह दिन पितरों के तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के लिए समर्पित है। लेकिन इस पावन तिथि पर तुलसी पूजन और तुलसी चालीसा का पाठ करने का भी बड़ा महत्व है।

    तुलसी पूजा से न केवल घर की दरिद्रता दूर होती है, बल्कि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा भी मिलती है। शास्त्रों में तुलसी को हरिप्रिया कहा गया है। वहीं, वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya 2026) के दिन तुलसी चालीसा का पाठ परम फलदायी माना गया है। आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।

    तुलसी चालीसा पाठ के 3 चमत्कारी लाभ

    • इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ कर उसकी मंजरी भगवान विष्णु को अर्पित करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और परिवार पर लगा पितृ दोष समाप्त होता है।
    • अगर आपके घर में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होते हैं, तो अमावस्या की शाम तुलसी के पास घी का दीपक जलाकर चालीसा का पाठ करें।
    • इस पावन तिथि पर तुलसी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक विचारों का संचार होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

    amavashya puja ritiuals

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    कैसे करें वैशाख अमावस्या पर तुलसी पूजन?

    • सुबह स्नान के बाद सबसे पहले सूर्य देव को जल दें, फिर तुलसी के पौधे में शुद्ध जल अर्पित करें।
    • साफ आसन पर बैठकर शांत मन से 'तुलसी चालीसा' का पाठ करें। पाठ के दौरान अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
    • पाठ पूरा होने के बाद तुलसी के पौधे की तीन बार परिक्रमा करें और अपनी मनोकामना दोहराएं।
    • शाम के समय तुलसी की जड़ के पास एक मुखी घी का दीपक जलाएं।
    • अंत में आरती करें।

    ।।श्री तुलसी चालीसा।। (Tulsi Chalisa)

    (दोहा)

    खबरें और भी

    श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
    जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।

    (चौपाई)

    नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
    दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
    विष्णुप्रिया जय जयति भवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
    भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
    जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
    करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
    कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
    तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
    कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
    वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
    श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
    कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
    छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
    तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
    औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता।
    देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
    वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
    नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
    नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
    नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
    नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
    नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
    नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
    जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
    निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
    करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
    शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
    करहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
    मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
    जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
    बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
    प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
    चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
    करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
    पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
    यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
    करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
    है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

    ।।दोहा।।
    तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
    भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
    यह श्री तुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
    गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

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