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    आरती के बिना अधूरी है संकर्षण चतुर्थी की पूजा, जरूर करें इसका पाठ, घर में होगा रिद्धि-सिद्धि का वास

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 09:14 AM (IST)

    संकर्षण विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2026) पर भगवान गणेश की पूजा का विधान है। ...और पढ़ें

    Vinayak Chaturthi 2026: वैशाख विनायक चतुर्थी आरती। (Ai Generated Image)

    Vinayak Chaturthi 2026: वैशाख विनायक चतुर्थी आरती। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. आज संकर्षण चतुर्थी मनाई जा रही है

    2. यह दिन गणेश जी को समर्पित है

    3. आरती से ही पूजा पूर्ण मानी जाती है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। संकर्षण चतुर्थी का पावन व्रत बेहद शुभ माना जाता है। यह पूरा दिन विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि व्रत और पूजा-पाठ का पूरा फल तब तक नहीं मिलता, जब तक की आरती न की जाए। ऐसे में आइए गणेश जी की भव्य आरती करते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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    Ai Generated Image

    ॥श्री गणेश जी की आरती॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

    माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

    लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

    बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    ‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।

    कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

    ।। चन्द्र देव की आरती।।

    ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

    दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।

    रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।

    दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।

    जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।

    सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।

    योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।

    वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।

    प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।

    शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।

    धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।

    विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।

    सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।

    ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

    दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।