यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 21, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Sawan 2024: क्यों भगवान शिव को प्रिय है बेलपत्र? एक क्लिक में पढ़ें पौराणिक कथा
देवों के देव महादेव की महिमा निराली है। अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही जीवन में खुशियों क ...और पढ़ें

HighLights
- सावन सोमवार पर शिववास योग का निर्माण हो रहा है।
- जलाभिषेक से देवों के देव महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
- सावन महीने में हर सोमवार पर व्रत रखा जाता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Sawan Somwar 2024: हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से सावन महीने की शुरुआत होती है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। विष्णु पुराण में निहित है कि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से जगत के पालनहार भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं। अतः सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। इस अवधि में देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। भगवान शिव महज जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भगवान शिव को बेलपत्र क्यों पसंद है और इसकी कथा क्या है? आइए जानते हैं-
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कथा
शिव पुराण के अनुसार, चिर काल में भील नामक एक डाकू था, जो परिवार के पालन-पोषण के लिए चोरी करता था। एक बार भील डाकू सावन महीने में राहगीरों को लूटने के लिए वन में चला गया। इस समय वह एक वृक्ष पर चढ़कर ताक में बैठ गया। हालांकि, दिन में एक भी राहगीर उस रास्ते से नहीं गुजरा। भील डाकू संध्याकाल तक राहगीरों की प्रतीक्षा करता रहा। शाम होने के बाद भी कोई नहीं आया।
यह देख भील डाकू सोचा, शायद किसी ने उसे आते देख लिया है। इसके लिए देर से राहगीर गुजरेगा। कुछ देर और कुछ देर और सोचकर रात्रि के प्रथम पहर तक पेड़ पर बैठा रहा। इसके बाद उसे समझ आया कि शायद अब कोई नहीं आएगा। हालांकि, रात हो गई थी। यह सोच वह पेड़ से नहीं उतरा कि नीचे कोई हिंसक जानवर हो सकता है। वह पेड़ पर ही बैठ रहा। भूख-प्यास के चलते भील डाकू को नींद भी नहीं आ रही थी।
वह इधर-उधर देख पेड़ के पत्ते तोड़-तोड़कर नीचे फेंकने लगे। साथ ही रात्रि भय से बचने के लिए शिव-शिव कर रहा था। नीचे पूर्व से शिवलिंग था। वह वृक्ष बेल का था। अतः बेलपत्र शिवलिंग को अर्पित हो रहा था। भील डाकू की भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव प्रकट हुए। भगवान शिव को देखकर भील डाकू प्रसन्न हो उठा।
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उस समय से भील डाकू भगवान शिव की भक्ति में लीन गया। साथ ही गलत आचरणों को भी त्याग दिया। कहते हैं कि भगवान शिव की भक्ति से भील डाकू को मरणोपरांत शिव धाम प्राप्त हुआ। कालांतर से पूजा के समय भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाया जाता है।
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