यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Sawan 2025: सावन महीने में पूरी होती है मनचाहे वर की मुराद, फिर क्यों नहीं होते इस दौरान विवाह
इस साल सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हुई थी जो 9 अगस्त तक चलने वाला है। इस माह में शिव जी की आराधना करने से वह प्रसन्न होते हैं और साधक की सभी मनोकामनाएं ...और पढ़ें

HighLights
- भगवान शिव को प्रिय माना गया है सावन का महीना।
- भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए खास है सावन।
- सावन सोमवार व्रत करने से पूरी होती है हर इच्छा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन की पूरी अवधि भगवान शंकर की आराधना के लिए समर्पित मानी गई है। विशेषकर सावन सोमवार का दिन। कई लोग सावन सोमवार का व्रत करते हैं, खासकर कुवारी कन्याएं इस व्रत को मनचाहे व योग्य वर की प्राप्ति के लिए करती हैं। लेकिन सावन के माह में विवाह नहीं किए जाते। क्या आप इसका कारण जानते हैं।
क्यों नहीं होता विवाह
सावन चातुर्मास में आता है और इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य की मनाही होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास जिसमें आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन माह आता है। इस अवधि में भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में होते हैं।
ऐसे में यदि इस अवधि में शादी-विवाह जैसे कार्य किए जाएं, तो उसमें भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता। यही कारण है कि चातुर्मास में आने वाले सावन के महीने में भी शादी व अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते।
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(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
कब से कब तक है चातुर्मास
आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है, जो कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवउठनी एकादशी तक चलता है। ऐसे में इस साल चातुर्मास की शुरुआत 6 जुलाई से हो चुकी है, जो 1 नवंबर तक चलेगा।
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सावन में क्या करना चाहिए
सावन के महीने में शिव जी की कृपा के लिए सावन सोमवार का व्रत जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही आप सावन सोमवार पर या फिर रोजाना भगवान शिव के मंत्रों का जप भी कर सकते हैं। सावन में रोजाना घर पर ही या फिर मंदिर जाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके साथ ही आपको सावन में रोजाना शिव चालीसा का पाठ से भी लाभ देखने को मिल सकता है।
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करें इन मंत्रों का जप
1. शिव जी का मूल मंत्र -
ॐ नमः शिवाय॥
2. महामृत्युंजय मंत्र -
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
3. रूद्र मंत्र -
ॐ नमो भगवते रूद्राय।
4. रूद्र गायत्री मंत्र -
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
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