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    पीरियड्स में 'सावन सोमवार व्रत' रखना सही है या नहीं? महिलाओं के लिए व्रत के नियम और जरूरी बातें

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 10:01 AM (IST)

    मासिक धर्म में शिव पूजा करने के सही तरीके और क्या करें क्या न करें, इसकी पूरी जानकारी यहां पढ़ें। ...और पढ़ें

    पूजा-पाठ के कुछ शास्त्रीय नियम जानें।

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस महीने में पड़ने वाले सोमवार का व्रत सुहागिन महिलाएं और कुंवारी लड़कियां खासतौर पर रखती हैं। लेकिन कई बार सवाल उठता है कि अगर इन्हीं दिनों में पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें? क्या व्रत तोड़ देना चाहिए या फिर कुछ नियमों के साथ इसे जारी रखा जा सकता है?

    एस्ट्रोपत्री के ज्योतिष श्री चंद्रेश शर्मा के अनुसार, "हां, महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी सावन सोमवार का व्रत रख सकती हैं।" हालांकि, इस स्थिति में पूजा-पाठ के कुछ शास्त्रीय नियमों में बदलाव हो जाता है जिनका पालन करना जरूरी है।

    व्रत संकल्प और मानसिक व्रत का नियम

    व्रत न तोड़ें: यदि आपने सावन सोमवार के व्रतों की श्रृंखला का संकल्प लिया है, जैसे लगातार 4 या 5 सोमवार का व्रत, तो बीच में पीरियड्स आने पर भी व्रत को तोड़ा नहीं जाता। शास्त्रों में माना जाता है कि संकल्प एक बार ले लेने के बाद उसे पूरा करना चाहिए। व्रत बीच में छोड़ने से उसका फल कम हो सकता है।

    मानसिक व्रत रखें: पीरियड्स के दिनों में आप उपवास पूरा कर सकती हैं। इस दौरान मन ही मन भगवान शिव का ध्यान करें और मानसिक रूप से व्रत का पालन करें। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से किया गया मानसिक व्रत भी उतना ही फलदायी होता है।

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    पूजा विधि से जुड़े मुख्य नियम

    पीरियड्स के समय शास्त्रों में पूजा सामग्री और मंदिर से दूरी बनाए रखने का विधान बताया गया है। इस दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

    स्पर्श से बचें: पीरियड्स के दौरान शिवलिंग, पूजा सामग्री, जल, दीपक या मंदिर की किसी भी वस्तु को स्पर्श नहीं करना चाहिए। इसे अपवित्र माना जाता है। इसलिए पूजा स्थान और मंदिर से थोड़ी दूरी बनाकर रखें।

    मानसिक जाप करें: आप पूजा स्थान से दूर बैठकर मन ही मन मंत्रों का जाप कर सकती हैं। "ॐ नमः शिवाय" का जाप, शिव चालीसा का पाठ या शिव स्तुति मानसिक रूप से करना सबसे उत्तम माना गया है। इससे मन शुद्ध रहता है और भगवान शिव से जुड़ाव बना रहता है।

    दूसरों से कराएं पूजा: यदि आप जलाभिषेक करना चाहती हैं तो ये कार्य परिवार के किसी अन्य सदस्य से करवा सकती हैं। पति, बहन, मां या बच्चे आपकी ओर से शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं। आप केवल पास बैठकर मानसिक रूप से प्रार्थना करें।

    व्रत कथा सुनना: पीरियड्स में व्रत कथा सुनना वर्जित नहीं है। आप पूजा स्थान से दूर बैठकर या मोबाइल, टीवी के माध्यम से सावन सोमवार की व्रत कथा सुन सकती हैं। कथा सुनने से व्रत का पुण्य मिलता है।

    जरूरी बातें

    1. साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें और स्वस्थ महसूस न होने पर जबरदस्ती उपवास न करें।

    2. मन में किसी तरह का अपराध बोध न रखें। भगवान भाव के भूखे हैं, नियमों के नहीं।

    3. अगर आप असहज महसूस कर रही हैं तो उस दिन केवल फलाहार लेकर मानसिक पूजा करें।

    अत: पंडित श्री चंद्रेश शर्मा कहते हैं कि श्रद्धा सबसे बड़ी पूजा है। नियमों का पालन करते हुए पूरे मन से शिव का ध्यान करने पर भगवान शिव हर मनोकामना पूरी करते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।