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    इस दिन लगने जा रहा है साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, भारत में दिखाई देगा या नहीं?

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 11:44 AM (IST)

    साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या पर लगेगा। यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। ...और पढ़ें

    कैसे दूर करें सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव?

    कैसे दूर करें सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव?

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026) का विशेष महत्व है। ग्रहण से 12 घंटे पहले से सूतक काल की शुरुआत होती है। इस दौरान पूजा-अर्चना करने की मनाही है। ऐसा माना जाता है कि वर्जित कामों को करने से जातक पर अशुभ प्रभाव पड़ता है।

    ग्रहण समापन के बाद स्नान कर मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें और अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन कामों को करने से सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव दूर होता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बतातें है कि कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2026 kab Hai) और यह भारत में दिखाई देगा या नहीं।

    Surya Grahan 2026 daan

    (Image Source: AI-Generated) 

    सूर्य ग्रहण 2026 डेट और टाइम (Solar Eclipse 2026 Date and Time)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या है। इसी दिन साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा। ग्रहण की शुरुआत रात को 09 बजकर 04 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 13 अगस्त की सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा। ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिसकी वजह से इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।

    कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?

    12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण आइसलैंड, ग्रीनलैंड, आर्कटिक, अटलांटिक महासागर और उत्तरी स्पेन, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली में दिखाई देगा।

    ऐसे दूर करें अशुभ प्रभाव

    • सूतक काल की शुरुआत से पहले खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव भोजन पर नहीं पड़ता।
    • सूर्य ग्रहण के दौरान पूजा-अर्चना करने की मनाही है, लेकिन इस अवधि के दौरान आप "ॐ सूर्याय नमः", महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र का जप जरूर करें। इससे सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव दूर होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
    • सूर्य ग्रहण के खत्म होने के बाद स्नान करें और मंदिर एवं घर की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें। देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है।

    सूर्य पौराणिक मंत्र

    जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।

    खबरें और भी

    तमोsरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोsस्मि दिवाकरम ।।

    सूर्य वैदिक मंत्र

    ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च ।

    हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन ।

    सूर्य गायत्री मंत्र

    ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात ।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।