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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Sawan Purnima 2024: सावन पूर्णिमा पर शोभन योग समेत बन रहे हैं 5 अद्भुत संयोग, बनेंगे सारे बिगड़े काम

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Mon, 12 Aug 2024 08:19 PM (IST)

    सनातन धर्म में सावन का महीना (Sawan Purnima 2024) देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस महीने में भगवान शिव संग मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती ...और पढ़ें

    Sawan Purnima 2024: सावन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
    Sawan Purnima 2024: सावन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. रक्षाबंधन का त्योहार सावन पूर्णिमा पर मनाया जाता है।
    2. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं।
    3. इस शुभ अवसर पर भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाकर विधि-विधान से जगत के पालनहार भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी की पूजा (Sawan Purnima Puja Vidhi) करते हैं। साथ ही जप-तप और दान-पुण्य करते हैं। इस शुभ तिथि पर भगवान विष्णु की उपासना और दान-पुण्य करने से जातक को कभी न क्षय होने वाले फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जातक को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनकी कृपा से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। ज्योतिषियों की मानें तो सावन पूर्णिमा पर दुर्लभ शोभन योग समेत कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।

    यह भी पढ़ें: 18 या 19 अगस्त, कब है रक्षाबंधन? नोट करें राखी बांधने का सही समय


    श्रावण पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Sawan Purnima Shubh Muhurat)

    पंचांग के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा 19 अगस्त (अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार) को देर रात 03 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और 19 अगस्त को देर रात 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में सूर्य उदय से तिथि की गणना की जाती है। अतः 19 अगस्त को सावन पूर्णिमा मनाई जाएगी। सावन पूर्णिमा पर भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है। इसके लिए19 अगस्त को ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा।

    शोभन योग ( Auspicious Yogas 2024)

    ज्योतिषियों की मानें तो सावन पूर्णिमा पर दुर्लभ शोभन योग का संयोग बन रहा है। इस योग का निर्माण देर रात 12 बजकर 47 मिनट तक है। ज्योतिष शोभन योग को शुभ कार्यों का श्रीगणेश करने के लिए उत्तम मानते हैं। इस योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी। साथ ही लक्ष्मी नारायण जी का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा।

    करण

    सावन पूर्णिमा पर बव करण का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण भद्रा के बाद हो रहा है। वहीं, समापन देर रात 11 बजकर 55 मिनट पर हो रहा है। इसके बाद बालव करण का योग बनेगा। ज्योतिष बव और बालव करण को शुभ मानते हैं। इस दिन श्रवण नक्षत्र का संयोग 08 बजकर 10 मिनट तक है। इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली का आगमन होता है।

    खबरें और भी

    पंचांग

    सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 05 मिनट पर

    सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 56 मिनट पर

    चन्द्रोदय- शाम 06 बजकर 54 मिनट पर

    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 36 मिनट से 05 बजकर 20 मिनट तक

    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 39 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक

    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 56 मिनट से 07 बजकर 18 मिनट तक

    निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।