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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 06, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव की पूजा के समय करें इस स्तोत्र का पाठ, कालसर्प दोष में मिलेगी राहत

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Tue, 06 May 2025 07:00 PM (IST)

    ज्योतिषियों की मानें तो प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि (Shukra Pradosh Vrat Puja Vidhi) पर काले तिल मिश्रित जल से देवों के देव म ...और पढ़ें

    Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव को कैसे प्रसन्न करें?
    Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव को कैसे प्रसन्न करें?

    HighLights

    1. सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व है।
    2. इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है।
    3. महादेव की पूजा से हर मनोकामना पूरी होती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत मनाया जाता है। इस दिन देवों के देव महादेव और जगत की देवी मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना महादेव की कृपा से पूरी होती है।

    प्रदोष व्रत का फल दिन अनुसार प्राप्त होता है। शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही विवाहित जातकों के दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।

    इसके लिए साधक श्रद्धा भाव से प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करते हैं। अगर आप भी मायावी ग्रह राहु और केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो प्रदोष व्रत पर शिव-शक्ति की पूजा के समय नाग स्तोत्र का पाठ अवश्य करें।

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    ॥ नाग स्तोत्रम् ॥

    ब्रह्म लोके च ये सर्पाःशेषनागाः पुरोगमाः।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    विष्णु लोके च ये सर्पाःवासुकि प्रमुखाश्चये।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    रुद्र लोके च ये सर्पाःतक्षकः प्रमुखास्तथा।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    खाण्डवस्य तथा दाहेस्वर्गन्च ये च समाश्रिताः।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    सर्प सत्रे च ये सर्पाःअस्थिकेनाभि रक्षिताः।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    प्रलये चैव ये सर्पाःकार्कोट प्रमुखाश्चये।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    धर्म लोके च ये सर्पाःवैतरण्यां समाश्रिताः।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    ये सर्पाः पर्वत येषुधारि सन्धिषु संस्थिताः।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    ग्रामे वा यदि वारण्येये सर्पाः प्रचरन्ति च।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    पृथिव्याम् चैव ये सर्पाःये सर्पाः बिल संस्थिताः।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    रसातले च ये सर्पाःअनन्तादि महाबलाः।

    नमोऽस्तु तेभ्यः सुप्रीताःप्रसन्नाः सन्तु मे सदा॥

    शिव प्रदोष स्तोत्र

    जय देव जगन्नाथ जय शंकर शाश्वत ।

    जय सर्वसुराध्यक्ष जय सर्वसुरार्चित ।।

    जय सर्वगुणातीत जय सर्ववरप्रद ।

    जय नित्यनिराधार जय विश्वम्भराव्यय ।।

    जय विश्वैकवन्द्येश जय नागेन्द्रभूषण ।

    जय गौरीपते शम्भो जय चन्द्रार्धशेखर ।।

    जय कोट्यर्कसंकाश जयानन्तगुणाश्रय ।

    जय भद्र विरुपाक्ष जयाचिन्त्य निरंजन ।।

    जय नाथ कृपासिन्धो जय भक्तार्तिभंजन ।

    जय दुस्तरसंसारसागरोत्तारण प्रभो ।।

    प्रसीद मे महादेव संसारार्तस्य खिद्यत: ।

    सर्वपापक्षयं कृत्वा रक्ष मां परमेश्वर ।।

    महादारिद्रयमग्नस्य महापापहतस्य च ।

    महाशोकनिविष्टस्य महारोगातुरस्य च ।।

    ऋणभारपरीतस्य दह्यमानस्य कर्मभि: ।

    ग्रहै: प्रपीड्यमानस्य प्रसीद मम शंकर ।।

    दरिद्र: प्रार्थयेद् देवं प्रदोषे गिरिजापतिम् ।

    अर्थाढ्यो वाऽथ राजा वा प्रार्थयेद् देवमीश्वरम् ।।

    दीर्घमायु: सदारोग्यं कोशवृद्धिर्बलोन्नति: ।

    ममस्तु नित्यमानन्द: प्रसादात्तव शंकर ।।

    शत्रव: संक्षयं यान्तु प्रसीदन्तु मम प्रजा: ।

    नश्यन्तु दस्यवो राष्ट्रे जना: सन्तु निरापद: ।।

    दुर्भिक्षमारिसंतापा: शमं यान्तु महीतले ।

    सर्वसस्यसमृद्धिश्च भूयात् सुखमया दिश: ।।

    एवमाराधयेद् देवं पूजान्ते गिरिजापतिम् ।

    ब्राह्मणान् भोजयेत् पश्चाद् दक्षिणाभिश्च पूजयेत् ।।

    सर्वपापक्षयकरी सर्वरोगनिवारिणी ।

    शिवपूजा मयाख्याता सर्वाभीष्टफलप्रदा ।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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