Shukra Pradosh Vrat: महादेव की कृपा से दूर होगी दरिद्रता, जीवन में आएगी सुख और समृद्धि
शुक्र प्रदोष व्रत की वह पौराणिक कथा जिसने एक निर्धन ब्राह्मणी और राजकुमार की किस्मत पूरी तरह से बदल दी। जानें कैसे शुक्रवार के दिन महादेव की पूजा से स ...और पढ़ें

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शुक्र प्रदोष व्रत (Shukra Pradosh Vrat) भगवान शिव को प्रसन्न करने और जीवन में सुख-समृद्धि पाने का एक अत्यंत प्रभावशाली मार्ग है। जब त्रयोदशी तिथि (trayodashi tithi) शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो उसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि आर्थिक कष्टों को दूर कर वैभव भी प्रदान करता है।
शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी, जिसके पति का देहांत हो चुका था। उसका कोई सहारा नहीं था, इसलिए वह सुबह होते ही अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगने निकल पड़ती थी। वह स्वयं भी भूखी रहती और अपने पुत्र का पेट पालती थी।
एक दिन भिक्षा मांगकर लौटते समय उसे नदी किनारे एक अत्यंत सुंदर बालक दिखाई दिया, जो उदास बैठा था। वह बालक विदर्भ देश का राजकुमार था, जिसके पिता को शत्रुओं ने युद्ध में मारकर उसका राज्य छीन लिया था। ब्राह्मणी को उस पर दया आ गई और वह उसे अपने घर ले आई।

(Image Source: AI-Generated)
कुछ समय बाद, ब्राह्मणी उस राजकुमार और अपने पुत्र के साथ शांडिल्य ऋषि के आश्रम गई। वहां ऋषि ने उन्हें शिव के 'प्रदोष व्रत' की महिमा बताई और व्रत करने की विधि सिखाई। ब्राह्मणी और दोनों बालकों ने पूरी श्रद्धा के साथ शुक्र प्रदोष का व्रत रखना शुरू किया।
खबरें और भी
महादेव की कृपा से राजकुमार की भेंट एक गंधर्व कन्या से हुई। गंधर्व राज ने जब जाना कि वह राजकुमार है, तो उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया और उसे एक विशाल सेना प्रदान की। राजकुमार ने अपनी सेना के साथ शत्रुओं पर आक्रमण किया और अपना खोया हुआ राज्य वापस पा लिया। उसने ब्राह्मणी के पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया और ब्राह्मणी के सारे कष्ट दूर कर दिए। जिस प्रकार महादेव ने उनकी दरिद्रता दूर की, वैसी ही कृपा वे व्रत करने वाले हर भक्त पर करते हैं।
पूजा का महत्व और विधि
प्रदोष काल: सूर्यास्त के समय जब दिन और रात का मिलन होता है, उसे प्रदोष काल कहते हैं। इस समय शिव की पूजा सबसे अधिक फलदायी होती है।
सफेद वस्तुओं का दान: शुक्रवार का दिन होने के कारण इस दिन दूध, दही या चावल का दान करना शुभ माना जाता है।
यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat के दिन करें शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ, महादेव की कृपा से शुरू होंगे अच्छे दिन
यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat 2026: अगर हाथ में नहीं टिकता पैसा, तो प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें इस स्तोत्र का पाठ
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।