जब बेटी की जिद के आगे बेबस हुए शुक्राचार्य! अपने ही पेट में जिंदा करना पड़ा दुश्मन का बेटा
आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर किस तरह शुक्राचार्य को संजीवनी विद्या प्राप्त हुई और उन्होंने इसका इस्तेमाल किस तरीके से किया।

शुक्राचार्य ने दुश्मन के बेटे को क्यों सिखाई संजीवनी विद्या? (AI Generated Image)
HighLights
शुक्राचार्य को शिव जी से मिला था संजीवनी विद्या का वरदान
बेटी देवयानी के कहने पर कच को किया था पुनर्जीवित
विवशता के चलते कच को सिखानी पड़ी संजीवनी विद्या
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शुक्राचार्य भृगु ऋषि और ख्याति के पुत्र हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दैत्यों के गुरु के रूप में जाना जाता है। उनके पास “संजीवनी विद्या” थी, जिससे वह किसी भी मृत को जीवित कर सकते थे। इसी विद्या के चलते वह दैत्यों के गुरु बने। आज हम इस कथा के माध्यम से जनेंगे कि संजीवनी विद्या का इस्तेमाल अपने दुश्मन को बचाने के लिए क्यों किया।
कैसे किया संजीवनी विद्या का प्रयोग
शुक्राचार्य भगवान शिव के परम भक्त थे। उन्होंने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए निराहार रहकर और एकाग्रचित्त होकर कड़ी तपस्या की थी। फलस्वरूप शिव जी उनसे प्रसन्न हुए और उन्हें मृत-संजीवनी विद्या का वरदान दिया। इस विद्या से वह मृत प्राणियों को पुनः जीवित कर सकते थे। दैत्यों के गुरु होने के नाते शुक्राचार्य ने बड़ी मात्रा में मृत दानवों को पुनर्जीवित किया ताकि वह देवताओं को मात दे सकें।
देवगुरु के पुत्र को क्यों किया पुनर्जीवित
महाभारत के आदिपर्व में वर्णन कथा के अनुसार, शुक्राचार्य, बृहस्पति के प्रति ईर्ष्या की भावना रखते थे, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने देवगुरु बृहस्पति के पुत्र कच को पुनर्जीवित किया था। जिसका कारण यह है कि शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी, कच से प्रेम करती थी।
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(AI Generated Image)
जब यह बात असुरों को पता चली तो उन्होंने कच को मारकर उनकी अस्थियों को जलाकर शुक्राचार्य को पिला दिया था। जब यह बात देवयानी को पता चली, तो उन्होंने अपने पिता से कच को पुनर्जीवित करने की विनती की। शुक्राचार्य अपनी पुत्री के प्रेम के आगे विवश हो गए। लेकिन मुश्किल यह थी कि यदि वह कच को पुनर्जीवित करते, तो वह स्वयं मारे जाते।
इसलिए सिखाई संजीवनी विद्या
शुक्राचार्य ने कच की आत्मा को संजीवनी विद्या का ज्ञान दिया। कच को जैसे ही यह ज्ञान मिला, वह शुक्राचार्य का पेट फाड़कर बाहर निकल आया। जिससे शुक्राचार्य की मृत्यु हो गई। कच ने अपने शिष्य धर्म निभाया और संजीवनी विद्या के प्रयोग से शुक्राचार्य को जीवित दिया। इस तरह शुक्राचार्य को अपने ही शत्रु को संजीवनी विद्या सिखानी पड़ी।
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