केतकी के फूल को भगवान शिव ने क्यों दिया था श्राप, जानें यह पौराणिक कथा
आज हम आपको एक ऐसी पौराणिक कथा बताने जा रहे हैं, जिसमें यह वर्णन मिलता है कि आखिरकार भगवान शिव को केतकी का फूल क्यों अर्पित नहीं किए जाते। ...और पढ़ें

केतकी के फूल को क्यों मिला श्राप? (AI Generated Image)
HighLights
ब्रह्मा-विष्णु विवाद में शिव जी ने किया हस्तक्षेप
ब्रह्मा जी ने केतकी फूल से दिलवाई झूठी गवाही
शिव जी ने क्रोधित होकर केतकी को दिया श्राप
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शिव जी की आराधना में उन्हें कई चीजें अर्पित की जाती हैं, जैसे बेलपत्र, गंगाजल, दूध और शहद आदि। वहीं कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जिनका शिव जी की पूजा में उपयोग वर्जित माना गया है। इसी प्रकार केतकी के फूलों का उपयोग भी शिव जी की पूजा में करना उचित नहीं माना जाता, जिसके पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।
मिलती है ये पौराणिक कथा
शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि उन दोनें में से कौन सर्वश्रेष्ठ है। जब इस विवाद का कोई हल नहीं निकलता तो भगवान शिव को हस्तक्षेप करना पड़ा। तब भगवान शिव ने एक ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति की और कहा कि आप दोनों में से जो भी इस ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा।
भगवान विष्णु ने मानी हार
खुद को श्रेष्ठ साबित करने के लिए भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत खोजने निकल पड़े। इसके लिए विष्णु जी ने पाताल की ओर जाकर ज्योतिर्लिंग का अंत खोजने की कोशिश की। वहीं ब्रह्मा जी ज्योतिर्लिंग का ऊपरी सिरा खोजने के लिए आकाश की ओर चले गए। जब बहुत प्रयासों के बाद भी विष्णु भगवान को शिवलिंग का छोर नहीं मिला, तो वह रुक गए और उन्होंने हार मान ली।

(AI Generated Image)
केतकी के फूल ने दी झूठी गवाही
ब्रह्मा जी जब ज्योतिर्लिंग का छोर खोज रहे थे, तो उन्हे रास्ते में केतकी का एक फूल मिला। ब्रह्मा जी को एक युक्ति सूझी और उन्होंने केतकी के फूल को भगवान शिव के सामने झूठी गवाही देने के लिए मना लिया। इसके बाद केतकी का फूल और ब्रह्माजी भगवान शिव के पास पहुंचे और ब्रह्मा जी ने कहा कि उन्हें ज्योतिर्लिंग की शुरुआत मिल गई है और केतकी का फूल इस बात का साक्षी है।
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शिव जी यह बात जानते थे कि ब्रह्मदेव झूठ बोल रहे हैं। ब्रह्मा जी के झूठ में गवाह बनने के कारण शिव जी क्रोधित हो गए और उन्होंने केतकी के फूल क अपनी पूजा में वर्जित कर दिया।
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