आखिर शिवलिंग के सामने ही क्यों विराजमान होते हैं नंदी, क्या आप जानते हैं यह पौराणिक रहस्य?
सोमवार को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। शिवलिंग के सामने नंदी की मूर्ति स्थापित होती है, जिसका एक पौराणिक रहस्य है। ...और पढ़ें

शिवलिंग के सामने नंदी क्यों? (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सोमवार का दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक किया जाता है। शिवलिंग के ठीक सामने महादेव के भक्त नंदी की मूर्ति स्थापित होती है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि शिवलंग के सामने ही नंदी की मूर्ति क्यों विराजमान होती है। शायद ही बारे में बहुत ही काम लोगों को इसके पीछे का पौराणिक और आध्यात्मिक रहस्य पता होगा। आइए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं इसके रहस्य के बारे में।
नंदी कैसे बनें भगवान शिव की सवारी?
पौराणिक कथा के अनुसार, शिलाद नाम के ऋषि थे। वह महादेव की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। ऐसे में उनसे एक बार पितरों ने कहा कि उनका वंश समाप्त हो रहा है। इसलिए संतान प्राप्ति के लिए कोई उपाय करें। इसके लिए उन्होंने महादेव की तपस्या की। महादेव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और पुत्र की प्राप्ति का वरदान दिया। कुछ समय के बाद उन्हें भूमि को जोत रहे थे, तब उन्हें एक बालक मिला और उन्होंने उसका नाम नंदी रखा।

एक बार महर्षि शिलाद में आश्रम में 2 संतों का आगमन हुआ और उन्होंने बताया कि नंदी की आयु बेहद काम है। वह 8 वर्ष ही जीवित रहेंगे। इस बात को सुनकर शिलाद परेशान हुए। तब बाद नंदी ने पिता से कहा कि पिता जी आपने मुझे महादेव की कृपा से पाया है। इसके बाद नंदी महादेव की तपस्या करने लगे।
उनकी भक्ति को देख महादेव प्रसन्न हुए और नंदी के सामने भगवान शिव प्रकट हुए। प्रभु ने नंदी से कहा कि तुम तो मेरे ही अंश हो, तुम्हें मृत्यु का भय कैसे हो सकता है? उन्होंने अजर-अमर होने का वरदान दिया। उसी दिन से नंदी भगवान शिव के अभिन्न अंग बनें और शिवलिंग के सामने विराजमान हुए। इसलिए हर शिव मंदिर में शिवलिंग के सामने नंदी की मूर्ति को विरजामन किया जाता है।
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नंदी पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नंदी की पूजा के बिना महादेव की पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए शिव पूजा के दौरान नंदी की पूजा जरूर करें। नंदी की साधना करने से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है। जीवन में सुख-शनि बनी रहती है।
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