मंदिरों में क्यों बांधा जाता है अलग रंगों का कलावा, रक्षासूत्र का क्या है धार्मिक महत्व?
मंदिरों में पूजा के दौरान हाथ में बांधे जाने वाले कलावा का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे रक्षा सूत्र या मौली भी कहते हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर ...और पढ़ें
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मंदिरों में अलग रंगों का कलावा बांधने का महत्व (Image Credit- AI)

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धर्मं डेस्क, नई दिल्ली। मंदिरों में पूजा के दौरान हाथ में कलावा बांधना शुभ माना जाता है। इसे कई सारे लोग धागा, कलावा, रक्षा सूत्र और मौली भी कहते हैं। पूजा-पाठ की शुरूआत में ही इसे बांधा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इसे बांधने से आपके आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए बताते हैं मंदिरों में कौन-कौन से रंग के कलावे बांधे जाते हैं?
कलावा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा धारण करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश साथ ही, लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। कलावा बांधने की परंपरा के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं। कथाओं में भी इसका वर्णन किया गया है। साथ ही बताया गया है कि इससे जीवन में शुभता और सुरक्षा प्राप्त होती है।
लाल रंग का कलावा
लाल रंग शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह देवी दुर्गा और हनुमान जी की ऊर्जा को दर्शाता है। कलाई पर लाल कलावा बांधने से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है।

पीला रंग का कलावा
पीला रंग सात्विकता, ज्ञान और शांति का प्रतीक है। यह भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को प्रिय होता है। पीला कलावा मुख्य रूप से सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक होता है। इसे अक्सर शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मंदिरों में बांधा जाता है।
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काले रंग का कलावा
काला रंग नजर से बचाता है। इसे विशेष रूप से शनि देव या मां काली से जोड़ा जाता है। काला कलावा धारण करने से व्यक्ति पर बुरी नजर का प्रभाव नहीं पड़ता है। साथ ही आपके कार्यों में कोई रुकावट नहीं आती है।

क्या हैं कलावा बांधने के नियम?
- कलावा हमेशा मंदिर में भगवान के सामने या किसी शुभ कार्य के दौरान बांधना चाहिए।
- कलावा बांधते समय हाथों को कभी खाली नहीं रखना चाहिए। अक्षत या सिक्का हाथ में जरूर होना चाहिए।
- अविवाहित कन्याओं को कलावा दाहिने हाथ की कलाई पर बंधवाना चाहिए, जबकि विवाहित महिलाओं को बाएं हाथ की कलाई पर।
- कलावा बांधते समय मुट्ठी बंद रखनी चाहिए और दूसरे हाथ को सिर पर रखना चाहिए।
- कलावा बांधते समय आपको अपने इष्ट देवता को हमेशा स्मरण करना चाहिए।
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